5 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जब नहीॆ हो सका गणेश प्रतिमा विसर्जन, तो शेष नाग ने की गजानन की रक्षा, आज सबकी मुराद करते हैं पूरी

इस चमत्कार को जानने जरूर पढ़ लें ये खबर...हम आपको लेकर चल रहे हैं जबलपुर के शेषनाग गणेश मंदिर... जहां इस चमत्कार को देख हर कोई रह गया था हैरान..

3 min read
Google source verification
sheshnag_ganesh_temple_in_jabalpur_miracle_of_lord_ganesha_madhya_pradesh.jpg

मंगलवार को गणेश चतुर्थी के साथ गणेशोत्सव की शुरुआत हो गई। 10 दिन तक भक्त विघ्रहर्त गणेश जी की सेवा-अर्चना में लीन हो चुके हैं। हर गली-मोहल्ले और वहां स्थापित मंदिरों में, चौक-चौराहों पर सजे गणेश पांडालों में मंत्रोच्चार, भजनों का दौर जारी है। 11वें दिन गणेश प्रतिमा विसर्जन की रस्म अदा की जाएगी। हर साल गणेशोत्सव की ये रस्में निभाई जाती है। दोहराई जाने वाली इन रस्मों में मप्र के एक गणेश मंदिर में गणेश प्रतिमा विसर्जन की रस्म उस वक्त ऐतिहासिक क्षण बन गई, जब यहां स्थापित गणेश जी ने विसर्जन से ही इनकार कर दिया था। जीहां यह सच है... इस चमत्कार को जानने जरूर पढ़ लें ये खबर...हम आपको लेकर चल रहे हैं जबलपुर के शेषनाग गणेश मंदिर... जहां इस चमत्कार को देख हर कोई रह गया था हैरान..

जिस तरह मंदिरों या पूजा पंडालों में गणेश चतुर्थी के समय भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है और फिर 10 दिन बाद उसे विसर्जित की जाती है। ठीक उसी तरह जबलपुर के शेषनाग मंदिर में भी भगवान गणेश की अलग-अलग प्रतिमाएं स्थापित की जाती थीं। 50 साल पहले भी ऐसा ही किया गया था। उस समय फलों से लड्डुओं से भगवान गणेश की प्रतिमा तैयार की जाती थी और गणेश चतुर्थी के दिन स्थापित की जाती थीं। 10 दिन सेवा-अर्चना करने के बाद गणेश अनंत चतुर्थी के दिन उन्हें विसर्जित कर दिया जाता था। यह परंपरा 20 से 24 साल तक जारी रही।

ये भी पढें : अब आसमान नहीं तकेगा किसान, कृषक मित्र योजना बरसाएगी पानी, जानें क्या है योजना और कैसे दिलाएगी लाभ
ये भी पढ़ें :इस अदालत में वकील और जज भी लगाते हैं अर्जी, गणेशोत्सव के 10 दिन में मिल जाता है न्याय

27 साल पहले हुआ ऐसा वाकया

आज से 27 साल पहले जबलपुर के व्यापारी संघ के कुछ सदस्य नागपुर के प्रसिद्ध टेकड़ी गणेश मंदिर से मिट्टी लेकर आए और हर साल की तरह मिट्टी से भगवान गणेश की मूर्ति तैयार कर गणेश चतुर्थी के दिन उसे स्थापित किया। अगले 10 दिन तक उनका विधि-विधान से पूजा-पाठ और सेवा अर्चना की गई। अब जब अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान के विसर्जन की रस्म निभाने का समय आया, तो सभी तैयारियां पूरी कर ली गईं। लेकिन जैसे ही विसर्जन करने के लिए भक्तों ने गणपति जी की प्रतिमा उठाने का प्रयास किया, तो वह हिली भी नहीं। कई लोगों ने एक साथ मिलकर जोर लगाया लेकिन, उस समय ऐसा लगा जैसे गणपति बाप्पा की मूर्ति ने अपनी जगह से हिलने से ही इनकार कर दिया हो। उस समय गणेश प्रतिमा इतनी वजनदार हो गई थी जैसे वह मिट्टी की नहीं बल्कि कोई भारी-भरकम चट्टान है और अपनी जगह पर चिपक गई है। जब गणेश जी की प्रतिमा को उठाने में भक्त विफल हो गए, तो उन्होंने इसे भगवान गणेश की मर्जी समझकर वहीं छोड़ दिया।

तब बनाया शेषनाग गणेश मंदिर

बाद में व्यापारी संघ ने यहां भगवान गणेश का मंदिर स्थापित करवाने का निर्णय लिया। इसके लिए विशेष कलाकारों को बुलाया गया और नागपुर टेकड़ी गणेश की मिट्टी से ही जबलपुर के गंजीपुरा इलाके में भगवान गणेश के मंदिर की आधारशिला रखी गई। गणेश चतुर्थी के समय इस मंदिर परिसर में भव्य मेला लगता है, जिसमें विशाल भंडारा और प्रसाद वितरण का आयोजन भी किया जाता है। यहां शेषनाग करते हैं गणेश जी की रक्षा इस मंदिर में गणेश जी की प्रतिमा पर शेष नाग की प्रतिमा बनी हुई है। कहा जाता है कि खुद शेषनाग भगवान गणेश की रक्षा करते हैं। मंदिर परिसर में पुराना एक वृक्ष भी है। इसके नीचे महादेव, मां दुर्गा और साईं बाबा की प्रतिमा स्थापित है। कहा जाता है कि इस मंदिर में सच्चे दिल से भक्त जो मांगे मिलता है, कोई भी खाली हाथ नहीं जाता।

ये भी पढ़ें : Motivational Story: बेटी को क्रिकेट का शौक, पिता ने खेत में बना दी पिच, स्टोरी पढ़कर आ जाएगी दंगल के आमिर खान की याद

ये भी पढ़ें : महाकाल में महाप्रसादी की हाइटेक व्यवस्था, लाखों भक्तों के लिए मशीनें बनाएंगी दाल, चावल, सब्जी और रोटी