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जबलपुर में 50 हजार आवारा कुत्ते, बने मुसीबत, 6 साल की बच्ची को नोचा

जबलपुर में 50 हजार आवारा कुत्ते, बने मुसीबत, 6 साल की बच्ची को नोचा

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Stray dogs attack woman. Photo source: AI

stray dogs : पाटन में छह वर्षीय मासूम को आवारा कुत्तों के काटने का मामला सामने आने के बाद एक बार फिर आवारा कुत्तों की जनसंख्या को नियंत्रित करने के निगम की विफलता पर बहस शुरु हो गई है। शहर में 50 हजार आवारा कुत्ते हैं। हर आठ महीने में उनकी संख्या बढ़ जाती है। लेकिन, नगर निगम उनमें से 10 प्रतिशत का ही बधियाकरण कर पा रहा है। नगर निगम के कठौंदा के डॉग हाउस में भी प्रतिदिन औसतन 15 कुत्तों की नसबंदी की ही क्षमता है। शहर के बाजार, चौराहे, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन के आसपास और मुख्य मार्गों में खूंखार आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। कठौंदा के डॉग हाउस में बधियाकरण के पिंजरों की संख्या ५६ से बढ़ाकर १०० करने काम शुरू हो गया है। इसमें करीब डेढ़ माह लगने का अनुमान है। इसके बाद भी यहां लगभग 50-60 स्ट्रीट डॉग का ही बधियाकरण हो सकेगा।

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stray dogs : वीयू के साथ साझेदारी से प्रयास

वेटरनरी यूनिवर्सिटी में कुत्तों की नसबंदी के लिए आधुनिक ऑपरेशन थियेटर, प्रशिक्षित पशु चिकित्सकों की टीम और सुरक्षित निगरानी प्रणाली मौजूद है। लेकिन, नगर निगम स्ट्रीट डॉग की नसबंदी के लिए वीयू के साथ कोई समन्वय नहीं बना पा रहा है। दो साल पहले निगम और वीयू के बीच एमओयू के लिए प्रयास शुरू हुए थे। लेकिन, बात आगे नहीं बढ़ी थी। वीयू में हर महीने में केवल 4 से 5 कुत्तों की ही नसबंदी हो रही है। वीयू में मिलने वाली नसबंदी सुविधा केवल पालतू पशुओं के मालिकों के लिए उपलब्ध है। अस्पताल में इसके लिए लगभग हजार रुपए शुल्क लिया जाता है।

stray dogs : नियंत्रण के लिए बनेगा प्लान

महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू का कहना है कि शहर में आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए जल्दी ही मॉडल कार्य योजना बनाई जाएगी। इसके लिए वेटरनरी कॉलेज के विशेषज्ञ, जन संगठन, एक्टिविस्ट, शासकीय पशु चिकित्सक व नगर निगम के अधिकारियों की संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी। इससे ऐसी कार्य योजना बने जो प्रदेशभर के लिए मॉडल हो।