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लाखों टन गेहूं खरीदने की बना ली योजना, रखेंगे कहां पता नहीं

स्टेट बेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन ने अतिरिक्त जगह के लिए प्रशासन को लिखा पत्र

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Wheat will be purchased from April 15,

Wheat will be purchased from April 15,

बेयरहाउस की स्थिति
- 250 से ज्यादा सरकारी और निजी बेयर हाउस हैं जिले में
- 135 बेयर हाउस में 2.50 लाख मीट्रिक टन गेहूं का है स्टॉक
- 04 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी होनी है इस साल
- 10 हजार मीट्रिक टन गेहूं का स्टॉक भी मुश्किल है बेयर हाउस में
- 04 जगहों पर साइलोकैप बनाने की योजना बनाई है प्रशासन ने
- 02 लाख मीट्रिक टन गेहूं रखा जा सकेगा इन साइलोकैप में

इन बेयरहाउस में है गेहूं का स्टॉक
स्थान: बेयरहाउस की संख्या
जबलपुर : 20
रिछाई : 12
सिहोरा : 22
शहपुरा : 22
भेड़ाघाट : 04
करारी : 29
बडख़ेरा : 12
पाटन : 13

जबलपुर। इस साल धान की रेकॉर्ड खरीदी के बाद गेहूं के बम्पर उत्पादन को देखते हुए चार लाख मीट्रिक टन खरीदी का लक्ष्य रखा गया है। गेहूं उपार्जन के बाद उसका भंडारण करना जिला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। इसका कारण जिले के मौजूदा भंडारगृहों (बेयर हाउस) में 10 हजार मीट्रिक टन गेहूं का स्टॉक करने के लिए भी जगह नहीं है। प्रशासन ने गेहं के भंडारण के लिए तीन-चार जगहों पर साइलो कैप बनाने की योजना बनाई है। इसके लिए प्रत्येक जगह पर 15-20 एकड़ जमीन की जरूरत पड़ेगी। सिहोरा में 27 एकड़ जमीन साइलोकैप निर्माण के लिए उपयुक्त पाई गई है। शेष जगहों पर निरीक्षण किया जा रहा है। उधर, स्टेट बेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन ने गेंहू के भंडारण के लिए अभी से हाथ खड़े कर दिए हैं। कारपोरेशन ने अतिरिक्त जगह दिलाने के लिए प्रशासन को पत्र भी लिखा है।
धान की भी रेकॉर्ड खरीदी
इस साल धान खरीदी का आंकड़ा 3 लाख 11 हजार मीट्रिक तक पहुंच गया है। उपार्जित धान को जिले के 125 बेयर हाउस में भंडारित किया जा रहा है। जगह कम पडऩे पर तीन जगहों पर कैप बनाकर भंडारण किया जा रहा है।
भंडारित गेहूं की निकासी नहीं
जिले के निजी और सरकारी भंडारगृहों में वर्तमान में 2.50 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 30 हजार मीट्रिक टन दाल-दलहन का स्टॉक है। इसमें ज्यादातर गेहूं की खरीदी पिछले सीजन में की गई है। पीडीएस और एफसीआइ की ओर से यह गेहूं खुले बाजार में बेचने के साथ ही दूसरे राज्यों को दिया जाता है। यह प्रक्रिया भी काफी सुस्त है। जानकारों के अनुसार, यदि अप्रैल तक पीडीएस के लिए गेहूं की निकासी होती है तो भी कुल भंडारण में 60 से 70 हजार मीट्रिक टन गेहूं कम होगा।

गेहूं और धान के सुरक्षित भंडारण के लिए तीन स्थानों पर साइलोकैप तैयार किए जाएंगे। इसके लिए पनागर, पाटन और सिहोरा में 15-15 एकड़ जगह चिह्नित की गई है।
छवि भारद्वाज, कलेक्टर