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दूर तक फैल रहा इस शहर के गजक और चिक्की का स्वाद

जबलपुर में कारोबारी पैकेजिंग और वेरायटी कर रहे तैयार, मकर संक्रांति पर रहती है खूब मांग    

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यह है स्थिति
- जिले में 25 से अधिक बड़े कारखाने।
- छोटे कारखानों की संख्या 125 से ज्यादा।
- 500 से अधिक लोगों को मिलता है काम।
- गुड़ के मिश्रण से बनते हैं ज्यादातर उत्पाद।

जबलपुर। शहर में गजक और चिक्की (लइया) का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। मकर संक्रांति के त्योहार के समय इनकी मांग कई गुना बढ़ जाती है। इसलिए जबलपुर के कारखानों में पूरे समय भ_ियां चढ़ी रहती हैं। इन कारखानों के आसपास से गुजरने के दौरान खूशबू महसूस की जा सकती है। शहर में यह चीजें कई वेरायटी मेंं तैयार होने लगी हैं। खास स्वाद होने के कारण शहर के साथ महाकोशल क्षेत्र तथा दूसरे राज्यों में कुछ मात्रा में इसकी सप्लाई हो रही है। दिसंबर से लेकर मार्च के महीने तक चिक्की और गजक के कारखानों में काम तेज होता है। शहर में 25 से अधिक बड़े कारखाने हैं। यह सभी लघु उद्योग की श्रेणी में आते हैं। इसी प्रकार उपनगरीय क्षेत्रों में कई घरों में इससे जुड़ा काम होता है। ज्यादातर जगह इस काम में घर के लोग ही हाथ बंटाते हैं। इसी प्रकार श्रमिकों को भी काम मिलता है। एक अनुमान के अनुसार इस कारोबार से 500 से ज्यादा लोगों को रोजगार भी मिलता है।

बाहर से आवक में कमी
तिली, मूंगफली और नारियल से बनी गजक का स्वाद हर व्यक्ति लेना चाहता है। शहर में ग्वालियर, मुरैना आदि जगहों से गजक की आवक होती है। वहां इसका कच्चा माल आसानी से मिलता है। लेकिन, अब शहर में भी यह काम चलने लगा है। कुछ कारखानों में यह काम वर्षों से हो रहा है। लेकिन, अब इसकी पैकेजिंग पर ध्यान दिया है। आकर्षक पैकेंजिंग और लेवल के कारण ग्राहकों को यह लुभाने लगी है। इसलिए बाजार में जबलपुरी गजक की पकड़ मजबूत हो रही है।

ये उत्पाद होते हैं तैयार
तिली और मूंगफली की गजक, रोल गजक, नारियल गजक, मूंगफली-गुड़ की चिक्की, खजूर की चिक्की, सेव चिक्की, तिल के लड्डू, मूंगफली-बटर चिक्की, राजगिर चिक्की, गुड़पाग, शक्करपाग, सेव-गुड़ लड्डू, मूंगफली लड्डू, मुरमुरा लड्डू, गुड़ की जलेबी आदि।

शहर में बढ़ रहा काम
शहर में इस काम का विस्तार हो रहा है। गजक निर्माता एवं विक्रेता मोहित जैन ने बताया कि समय के हिसाब से इसमें परिवर्तन किए जा रहे हैं। नए स्वाद (फ्लेवर) और वेरायटी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। अब इसकी पैकेजिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसलिए महाकोशल के साथ कुछ बड़े शहरों में भी इसकी खपत बढ़ रही है। निर्माता एवं विक्रेता लकी गुप्ता ने बताया कि यह परम्परागत व्यवसाय है। कुछ महीनों के लिए यह चलता है। लेकिन, ग्राहकों को बेहतर से बेहतर चीजें उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है। शहर में बनी लइया और गजक को लोग खूब पसंद करते हैं।