
brother and sister love
जबलपुर. भाई-बहन का रिश्ता अनमोल है, जो एक दूसरे की जिंदगी बचाने के लिए खुद की जान भी जोखिम में डालने से पीछे नहीं हटते। ऐसे ही एक मामले में किडनी की समस्या से पीड़ित भाई की जिंदगी बचाने के लिए एक बहन अपने पति से ही भिड़ गई। पति ने सहमति देने से इनकार किया तो उसने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर पति को तलब कर लिया। हाईकोर्ट के जस्टिस विनय सराफ की पीठ ने राहत देते हुए पति की जगह किसी दूसरे करीबी रिश्तेदार की सहमति को मान्य किए जाने का आदेश पारित किया। मामला राजगढ़ जिले का है। यहां के निवासी अशोक पॅवार की किडनी काम नहीं कर रही है। लम्बा उपचार चला पर आराम नहीं मिला, तो डॉक्टरों ने किडनी ट्रांसप्लांट ही एकमात्र उपाय बताया। इससे परेशान परिवार ने किडनी डोनेशन के लिए जांच करानी शुरू की तो बहन की किडनी मैच कर गई। शेष @ पेज 10
इस पर बहन तैयार हो गई पर उसका पति इसके खिलाफ हो गया। उसने पत्नी के किडनी डोनेट करने के सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। पारिवारिक स्तर पर समझाइस की पहल बेकार रही तो पत्नी ने बड़ा कदम उठाते हुए पति के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। उसने बताया कि उसके भाई का निजी अस्पताल में उपचार चल रहा है, उसकी बीमारी सीकेडी स्टेज - 5 तक पहुंच गई है। भाई की जान बचाने के लिए उसे किडनी डोनेट करने की अनुमति दी जाए।
हाई कोर्ट ने आदेशित किया कि पति के स्थान पर महिला को कोई करीबी रिश्तेदार एनओसी पर हस्ताक्षर कर सकता है। कोर्ट ने उसे सक्षम प्राधिकरण समिति के समक्ष आवेदन करने की अनुमति दी। महिला के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि मेडिकल जांच में उसकी किडनी दान के लिए उपयुक्त पाई गई है। परिवार के अन्य सदस्य सहमत हैं। कोर्ट ने सुनवाई करते हुए मानव अंगों और ऊतकों के प्रत्यारोपण नियम 2014 में दिये गये प्रावधानों का उल्लेख करते हुए उक्त आदेश जारी किये।
Updated on:
24 Apr 2024 12:02 pm
Published on:
24 Apr 2024 11:44 am
बड़ी खबरें
View Allजबलपुर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
