
unclaimed body of the old man lying in medical marchuri
जबलपुर। हम हमारे संस्कारों की दुहाई देते जरूर हैं पर हकीकत यह है कि हमारे सारे रिश्ते-नाते-संस्कार खोखले हो चुके हैं। जब भी कर्तव्य निभाने की बारी आती है, समाज का विकृत और विद्रूप चेहरा ही सामने आता है। संवेदनाहीन समाज और खोखले हो चुके जीवन मूल्यों का ऐसा ही एक वीभत्स चेहरा तब सामने आया जब एक बुजुर्ग की अस्पताल में मौत हो गई। भरपूरे परिवार के होने के बाद भी उस वृद्ध की लाश लावारिस पड़ी रही और जब बच्चों को यह जानकारी दी गई तब भी उन्हें कोई देखने तक नहीं आया।
नहीं करा सके अंतिम संस्कार
घर में पांच भाई-बहन, मां और बड़ा परिवार होने के बावजूद वृद्ध का शव तीन दिन से लावारिस की तरह मेडिकल की मरचुरी में पड़ा है। दो दिन तक शिनाख्तगी की पेंच ने मामला उलझाए रखा। पहचान हुई तो और मुश्किल बढ़ गई। भाइयों ने बुराई होने की बात कहते हुए शव लेने से मना कर दिया। भांजे और बहन ने चचेरा रिश्ता बता पल्ला झाड़ लिया। उम्मीद थी कि सौतेली मां का दिल पसीज जाएगा, लेकिन उसने भी मना कर दिया। अब पुलिस परिजन से कह रही है कि वे लिखकर दे दें कि शव नहीं लेना है, वह अंतिम संस्कार करा देंगे।
बच्चों को दे रहे थे आधी पेंशन
पुलिस के अनुसार ३० सितम्बर की सुबह ४ बजे नगर निगम की एम्बुलेंस ने दीनदयाल से एसबीआई चौक के बीच घायल हालत में पड़े व्यक्ति को मेडिकल के वार्ड १३ में भर्ती किया गया था। वहां शाम पांच बजे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने ये सोचकर शव मरचुरी में रखवा दिया कि कोई उसे तलाशता हुआ थाने आएगा। रविवार को मरचुरी पहुंचे मोक्ष संस्था के आशीष को खबर लगी। शव की तलाशी में बैंक पासबुक मिली। उसमें पता के तौर पर कृषि उपज मंडी स्कीम पांच विजय नगर लिखा था। विजय नगर थाने के एसआई रामप्रसाद तिवारी पते पर पहुंचे तो मालूम चला कि मृतक शशिमोहन सोनी (४८) भविष्य निधि कार्यालय से रिटायर थे। वर्ष २००० में उनकी पत्नी का निधन हो गया था। बच्चे भागलपुर बिहार स्थित ननिहाल में रह रहे हैं। पत्नी की मौत से उनकी मानसिक स्थित खराब हो गई। इसके चलते उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई थी। आधी पेंशन शशिमोहन को और आधी पेंशन उनके बच्चों को मिल रही थी। शशिमोहन के पांच भाइयों में तीन राजमोहन, बृजमोहन व शिवमोहन अधारताल और घमापुर में रहते हैं। चचेरी बहन किरन, बहनोई भरत गुप्ता, भांजा राहुल बरऊ मोहल्ला घमापुर में रहते हैं। बेटी-दामाद के साथ ही शशि की चचेरी मां कलावतीबाई भी रहती हैं। शव लेने कोई तैयार नहीं है। विवेचक रामप्रसाद तिवारी ने बताया कि परिजन शव लेने नहीं तैयार हुए तो मोक्ष संस्था की मदद से अंतिम संस्कार कराएंगे।
Updated on:
03 Oct 2017 09:07 am
Published on:
03 Oct 2017 09:06 am
बड़ी खबरें
View Allजबलपुर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
