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60 साल बाद सफाई के लिए खाली हुआ टैंक, मिला कुछ ऐसा कि भाग गए मजदूर

water tank : छह दशक बाद रांझी जलशोधन संयंत्र के क्लियर वॉटर टैंक को साफ करने पहुंचे मजदूर भी टैंक की बदहाल अवस्था देख अचकचा गए।

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water tank : छह दशक बाद रांझी जलशोधन संयंत्र के क्लियर वॉटर टैंक को साफ करने पहुंचे मजदूर भी टैंक की बदहाल अवस्था देख अचकचा गए। उसमें कई फीट मलबा भरा था, पानी पर काई जमी हुई थी। पानी साफ करने वाले रसायनों के अवशेष भी तल पर जमे हुए थे। बदबू से खड़ा होना भी दुश्वार था। मजदूर भी भाग गए।

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water tank: छह दशक बाद क्लीयर वॉटर टैंक की सिरे से सफाई, ढह गया था स्लैब
रसायनों के अवशेष, काई की परत मार रही बदबू, मजदूर भी अचकचाए

गुरुवार को नगर निगम ने दो दर्जन से ज्यादा श्रमिकों को इस काम में लगाया। सबसे पहले पंपों की सहायता से पानी को निकाला गया। फिर मलबा को हटाने का काम शुरू हुआ। इसके लिए क्रेन की सहायता से टैंक में जेसीबी मशीन को उतार कर मलबा निकाला गया। अनुमान है कि टैंक में 100 टन करीब मलबा निकाला जाना है।

water tank: स्लैब के टुकड़े भी निकाले

टैंक के भीतर गिरे स्लैब को मजदूरों के साथ जेसीबी लगाकर निकाला जा रहा है। ऐसे में अगले दो दिन शहर के 16 वार्डों के तीन से चार लाख लोगों को पानी की सप्लाई नहीं होगी। सफाई के बाद सुरक्षा के लिए टीन शेड लगाया जाएगा। मलबे के कारण इसकी गुणवत्ता प्रभावित होने की खबर पत्रिका ने प्रमुखता से उठाई थी।

water tank: 1963 में बना था टैंक

क्लीयर वॉटर टैंक का निर्माण 1963 में किया गया था। इसके ऊपर ढाला गया स्लैब करीब पांच साल से जर्जर स्थिति में है। इसके काफी सारे हिस्से टूटकर पानी में धंस गए थे। पूरा मलबा टैंक में ही धंस गया था। निगम ने स्लैब के होल को ढंकने के लिए टीन शेड जरुर लगाए थे, लेकिन वह भी पानी में समा गए।

water tank: एक साथ तीन स्थान पर काम

निगम ने परियट जलाशय में स्थित नहर, चाहिया चेबर के साथ ही क्लीयर वॉटर टैंक के उन्नयनीकरण व सुधार कार्य शुरू किया है। इस कारण गुरुवार से 5 मार्च तक जलापूर्ति बाधित रहेगी। ज्ञात हो कि 1 मार्च तक दोनों समय एवं 2 मार्च से 5 मार्च तक शाम की जलापूर्ति प्रभावित रहेगी।

water tank: सुबह आपूर्ति, शाम को नहीं आया पानी

गुरुवार को काम शुरू होने से पहले क्षेत्र में पानी की सप्लाई की गई लेकिन शाम को पानी नहीं पहुंचा। ऐसे में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। जिनके पास पानी के स्टोरेज के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं थे, वे यहां-वहां पानी के लिए भटकते रहे। लोगों का कहना है कि नगर निगम पानी की सप्लाई के लिए पुता वैकल्पिक इंतजाम करने चाहिए।

क्लीयर वाटर टैंक की सफाई का काम शुरू किया गया है। पूरा मलबा निकालने के उपरांत इस पर टीन शेड लगाया जाएगा। नए टैंक के लिए अमृत 2.0 के तहत काम होगा। इसके लिए जगह चिन्हित है। कार्य की वजह से पानी की सप्लाई टैंकर के माध्यम से की जा रही है।

  • कमलेश श्रीवास्तव, कार्यपालन यंत्री, नगर निगम