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ओवर क्वालीफिकेशन के आधार पर नियुक्तिसे क्यों कर रहे वंचित?

हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

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Jabalpur High Court

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जबलपुर. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि याचिकाकर्ता को ओवर क्वालीफिकेशन के आधार पर माध्यमिक शिक्षक पद पर नियुक्ति से वंचित क्यों किया जा रहा है? चीफ जस्टिस न्यायाधीश रवि मलिमठ व जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की डिवीजन बेंच ने राज्य शासन, स्कूल शिक्षा सचिव, जिला शिक्षा अधिकारी, सागर सहित अन्य को नोटिस जारी किए। जवाब के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया। जयसिंह नगर, सागर निवासी विभूति जैन की ओर से अधिवक्ता सचिन पांडे ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता मेधावी छात्र रहा है। उसने 2006 में प्रथम श्रेणी से दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। 2008 में प्रथम श्रेणी से गणित-विज्ञान विषय से बारहवीं परीक्षा उत्तीर्ण हुआ। 2011 में डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय से बीसीए की स्नातक डिग्री प्रथम श्रेणी में हासिल की। 2013 में एमए इंग्लिश की परीक्षा उत्तीर्ण हुआ। 2018 में बीएड उपाधि धारक हो गया। इसके साथ ही अतिथि शिक्षक बतौर सेवा दी। 2021 में माध्यमिक शिक्षक के पद विज्ञापित होने पर आवेदन किया। 2018 में वह अंग्रेजी विषय से माध्यमिक शाला शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण कर चुका था। इसके बावजूद उसे अंग्रेजी विषय से माध्यमिक शिक्षक इस तर्क के आधार पर नहीं बनाया गया कि उसके पास अंग्रेजी विषय से स्नातक डिग्री के स्थान पर ओवर क्वालीफिकेशन के रूप में एमए इंग्लिश की डिग्री है। इसे अनुचित बताते हुए याचिका दायर की गई। चीफ जस्टिस न्यायाधीश रवि मलिमठ व जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की डिवीजन बेंच ने राज्य शासन, स्कूल शिक्षा सचिव, जिला शिक्षा अधिकारी, सागर सहित अन्य को नोटिस जारी किए। जवाब के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि याचिकाकर्ता को ओवर क्वालीफिकेशन के आधार पर माध्यमिक शिक्षक पद पर नियुक्ति से वंचित क्यों किया जा रहा है?