विमान विशेषज्ञों को विमान को छिपाने व आवश्यकतानुसार छोटा बड़ा करने की भी तकनीक पता थी। सौदामिनी कला ग्रंथ व अन्य विमान शास्त्रों में बिजली , अग्नि, जल और वायु, गैस, तेल, सूर्य रश्मियों ,चुम्बक ,वायु से चलने वाले विमानों का उल्लेख है। सतयुग और त्रेता युग में मंत्रिका प्रकार के 56 विमानों व कलियुग में कृतिका प्रकार के यंत्र चालित 25 विमानों का उल्लेख है। वेदों में विमान संबंधी उल्लेख कई जगहों पर मिलते हैं। देवताओं के वैद्य अश्विनीकुमारों द्वारा निर्मित पक्षी की तरह उडऩे वाले त्रितल रथ, विद्युत-रथ और त्रिचक्र रथ का वर्णन है। महाभारत में श्री कृष्ण, जरासंध बाल्मीकि रामायण में 'पुष्पक विमानÓका उल्लेख है।