2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

नए साल पर हुआ था भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर, जंग के नायक ने कहा था, ‘लड़ेंगे आखिरी आदमी और आखिरी गोली तक’

साल 1949 में नए साल के मौके पर भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर हुआ था। इस जंग के नायक ने कहा था, 'लड़ेंगे आखिरी आदमी और आखिरी गोली तक'...

3 min read
Google source verification

मेजर सोमनाथ शर्मा (फोटो- @BizayShastriBJP)

15 अगस्त 1947 को भारत पर से ब्रिटिश उपनिवेशवाद खत्म हुआ। इसी के साथ ही, अविभाजित भारत दो हिस्सों बंट गया। धर्म के आधार पर अलग देश की मांग करने वाले मुस्लिम लीग के नेता मोहम्मद अली जिन्ना की बात अंग्रेजों ने मान ली थी। पाकिस्तान बन गया। इस दौरान कई रिसायतें ऐसी भी थीं, जो न तो तब तक भारत में मिली थी और न ही पाकिस्तान में शामिल हुई। उन्हीं में से एक रिसायत था कश्मीर का। जहां की बहुसंख्यक आबादी तो मुसलमानों की थी, लेकिन वहां पर राज एक हिंदू राजा का था।

जिन्ना की ये थी रणनीति

पाकिस्तान के कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना की रणनीति थी कि मुस्लिम बहुल कश्मीर को बलपूर्वक अपने में मिला लिया जाए। इसे लेकर 22 अक्टूबर 1947 को कबीलायी भेष में पाकिस्तान समर्थित पश्तून लश्करों ने कश्मीर पर आक्रमण कर दिया। आक्रमणकारियों ने तेजी से मुजफ्फराबाद, डोमेल और उरी पर कब्जा कर लिया। बारामूला तक पहुंचकर भयंकर कोहराम मचाया।

श्रीनगर से महज 15KM दूर थे पाकिस्तानी

पाकिस्तानी समर्थित कबीलाई लड़ाके श्रीनगर से महज 15 किलोमीटर दूर थे। ऐसे में महाराजा हरि सिंह ने भारत से सैन्य सहायता मांगी। भारत सरकार ने सहायता के बदले रियासत के भारत में विलय की शर्त रखी। 26 अक्टूबर 1947 को महाराजा ने इंस्ट्रुमेंट ऑफ एक्सेशन पर हस्ताक्षर किए, जिससे कश्मीर कानूनी रूप से भारत का अभिन्न अंग बन गया। साथ ही, कबीलाई भेष में पाकिस्तानी समर्थित लड़ाकों से लोहा लेने के लिए भारतीय सेना को वैध अधिकार भी मिले।

27 अक्टूबर को भारत का ऑपरेशन लॉन्च

27 अक्टूबर को भारतीय वायुसेना ने एयरलिफ्ट ऑपरेशन शुरू किया। डकोटा विमानों से 1 सिख रेजिमेंट सहित सैनिकों को श्रीनगर हवाई अड्डे पर उतारा गया। यह ऑपरेशन भारतीय सेना की त्वरित कार्रवाई का प्रतीक बना। इस लड़ाई में कई निर्णायक योद्धा वीरगति को प्राप्त भी हुए। उन्हीं में से एक थे। मेजर सोमनाथ शर्मा।

मेजर सोमनाथ थे चोटिल

दरअसल, भारतीय सेना जब कश्मीर कूच कर रही थी। उस दौरान मेजर सोमनाथ शर्मा का दाहिना हाथ फ्रैक्चर हो गया था। उस पर प्लास्टर चढ़ा था। डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी थी, लेकिन तब उन्होंने कहा था, 'मेरी कंपनी जा रही है, मैं कैसे पीछे रह सकता हूं?" और युद्ध में शामिल हो गए।

जम्मू कश्मीर के बडगाम में 3 नवंबर को मेजर सोमनाथ शर्मा की 4 कुमाऊं बटालियन ने 700 आक्रमणकारियों का मुकाबला किया। प्लास्टर बंधी बांह के बावजूद मेजर शर्मा ने अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ी। उन्होंने अपने अंतिम संदेश में कहा था। हम लड़ेंगे। हम आखिरी आदमी और आखिरी गोली तक लड़ेंगे। थोड़ी देर बाद एक मोर्टार शेल फटने से वे शहीद हो गए। उन्होंने मरणोपरांत सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

कश्मीर का बड़ा हिस्सा बचाया

भारतीय सेना ने अपने साहस का परिचय देते हुए कश्मीर का बड़ा हिस्सा बचा लिया। इस दौरान भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शिकायत दर्ज कराई। UN कमीशन फॉर इंडिया एंड पाकिस्तान (UNCIP) की मध्यस्थता से दोनों देशों ने युद्धविराम पर सहमति जताई। 31 दिसंबर 1948 की मध्यरात्रि से 1 जनवरी 1949 को युद्धविराम लागू हुआ। इसके बाद विस्तृत समझौते के लिए बातचीत हुई, जो कराची समझौता के रूप में 27 जुलाई 1949 को संपन्न हुआ। इस समझौते में दोनों देशों की सेनाओं की स्थिति के आधार पर सीजफायर लाइन निर्धारित की गई।