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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिले बस्तर के कलाकार, नई दिल्ली में साइलेंट कन्वर्सेशन में हुए शामिल, इन मुद्दों पर की खास बातचीत

President Draupadi Murmu Meets Bastarians : बस्तर के बीजापुर सहित छत्तीसगढ़ के चार कलाकारों ने देश भर के 60 अन्य कलाकारों के साथ बीते सप्ताह राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की।

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नई दिल्ली में साइलेंट कन्वर्सेशन में हुए शामिल

नई दिल्ली में साइलेंट कन्वर्सेशन में हुए शामिल

जगदलपुर। President Draupadi Murmu Meets Bastarians: बस्तर के बीजापुर सहित छत्तीसगढ़ के चार कलाकारों ने देश भर के 60 अन्य कलाकारों के साथ बीते सप्ताह राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की। इन कलाकारों के साथ राष्ट्रपति मुर्मु ने अमृत उद्यान ( पूर्व में मुगल गार्डन ) में लंबा वक्त गुजारा। द्रोपदी मुर्मु ने इन कलाकारों के साथ नाश्ते में बाघ संरक्षण के लिए उनके रहवास स्थल के जनजातिय वर्ग को प्रोत्साहित करने की बात कही।


देश भ्रर के यह सारे कलाकार नई दिल्ली में आयोजित एक कला प्रदर्शनी में अपनी कलाकृतियो के साथ पहुंचे थे। फ्रॉम मार्जिन्स टू द सेंटर विषय पर आधारित थी। इसमें बाघ संरक्षण के बारे में इन्होंने अपनी कलाकृतियां बनाई थीं।

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एनटीसीए के तत्वावधान में लगी थी प्रदर्शनी

प्रोजेक्ट टाइगर भारत में एक वन्यजीव संरक्षण पहल है। जिसे 1973 में बंगाल टाइगर की सुरक्षा और संरक्षण के प्राथमिक उद्देश्य के साथ शुरू किया गया था। देश में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) इस दिशा में कार्यरत है। इसके अलावा पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय सांकला फाउंडेशन भी इसमें सहयोसी हैं। इन तीनों के संयुक्त तत्वावधान में इंडिया हैबिटेट सेंटर में "साइलेंट कन्वर्सेशन: फ्रॉम मार्जिन्स टू द सेंटर" नामक एक कला प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था।

आदिवासी जीवन मूल्यों को अपनाने पर दिया जोर

प्रदर्शनी का अवलोकन करने के बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने इन कलाकारों को आमंत्रित किया था। उन्होंने इन कलाकारों को संबो धित करते इस बात पर जोर दिया कि भारत अब दुनिया की 70 प्रतिशत बाघ आबादी का घर है, उन्होंने इस सफलता का श्रेय इन समुदायों के योगदान को दिया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के गंभीर मुद्दे पर भी प्रकाश डाला और प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने के लिए आदिवासी समुदायों के जीवन-मूल्यों को अपनाने के महत्व पर जोर दिया।

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राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि अनियंत्रित भौतिकवाद और व्यावसायिकता ने पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव डाला है । बाघ संरक्षण के प्रयासों को मजबूत करने और स्वदेशी ज्ञान को बढ़ावा देने के लिए पारंपरिक और आधुनिक सोच के एकीकरण किया जाना चाहिए। राष्ट्रपति ने वन संरक्षण में शामिल लोगों के अधिकारों और योगदान को पहचानने और बनाए रखने के महत्व को भी रेखांकित किया।

गुजराज के साथ ही कलाकार जतीन कोर्राम, रागिरी ध्रुव, तानिया प्रधान ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। इन कलाकारों के साथ वन विभाग के नरेश पुलमंडारी, विशु मांझी, रिसर्च एशोसिएट सुरज नायर, अचानकमार टाइगर रिजर्व से वीएन तिवारी शामिल थे।