
कांगेर वैली
Kanger Valley National Park: बस्तर में स्थित कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, मध्य भारत के जैव विविधता का एक अनोखा खजाना है। कांगेर घाटी अपने प्राकृतिक सौंदर्य, जैव विविधता, रोमांचक गुफाओं के लिए देश-विदेश में विख्यात है।
यहां भारत के पश्चिमी घाट एवं पूर्वीय हिमालय में पाए जाने वाले पक्षियों को भी देखा गया है। यही वजह है कि देश के विभिन्न परिदृश्यों में पाए जाने वाले पक्षियों का कांगेर घाटी से संबंध एवं उनके रहवास को समझने का प्रयास समय-समय पर विशेषज्ञों द्वारा किया जाता रहा है। इसी कड़ी में आज से तीन दिनों तक कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान द्वारा पक्षी सर्वेक्षण का आयोजन किया गया है।
इन राज्यों से पहुँचे पक्षी विशेषज्ञ
इस पक्षी सर्वेक्षण में देश के 11 राज्यों के 56 पक्षी विशेषज्ञ पहुँच रहे है। जिनमें अशोक अग्रवाल, गरिमा भाटिया, अजय सर्वगनम, हक्कीमुद्दीन सैफी, मोहित साहू, मित्तल गाला,सोनू अरोरा सहित छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, गुजरात, केरल, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, राजस्थान से इस पक्षी सर्वेक्षण में शामिल होने आज बस्तर के फॉरेस्ट ट्रेनिंग स्कूल में पहुंचे। कांगेर घाटी के अलग-अलग स्थानों में ये पक्षी विशेषज्ञ अब 27 नवंबर तक पक्षी रहवासों का निरीक्षण कर यहां पाई जाने वाली पक्षियों का सर्वेक्षण करेंगे।
पक्षी विशेषज्ञ
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में बर्ड कॉउंत इंडिया एवं बर्ड्स एंड वाइल्ड लाइफ ऑफ छत्तीसगढ़ के सहयोग से पहली बार कांगेर घाटी में पक्षी सर्वेक्षण का आयोजन 25 नवंबर से 27 नवंबर तक किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में यह अपनी तरह का पहला सर्वेक्षण हैं जिसमें देश भर से इतनी संख्या में पक्षी विशेषज्ञ पहुँचे हैं। उद्यान के निदेशक धम्मशील गणवीर ने बताया आने वाले दिनों में इस सर्वेक्षण से घाटी में पक्षियों के रहवास और उनके अन्य पहलुओं की जानकारी सामने आएगी।
पॉकेट गाइड का विमोचन
आज कांगेर घाटी में पक्षियों के सर्वेक्षण के पूर्व आज जगदलपुर के फारेस्ट ट्रेनिंग स्कूल में एक कार्यक्रम के दौरान सीसीएफ, इंद्रावती टाइगर रिज़र्व फिल्ड निदेशक अभय श्रीवास्तव व कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान निदेशक धम्मशील गणवीर, एसडीओ आशीष कुमार द्वारा छत्तीसगढ़ के 167 पक्षी प्रजातियों की पॉकेट गाइड का विमोचन किया गया।
ईको टूरिज्म में बर्ड वाचिंग को मिलेगा नया आयाम
राष्ट्रीय उद्यान के निदेशक ने बताया कि इस सर्वेक्षण से राष्ट्रीय उद्यान प्रबंधन में सहायता मिलेगी साथ ही यहां ईको-टूरिज्म में बर्ड वॉचिंग के नए आयाम स्थापित होंगे।
Published on:
26 Nov 2022 12:19 pm
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