
CG News: वर्तमान में बस्तर के ग्रामीण पत्र के आस में लगातार वन भूमि पर अतिक्रमण कर जंगल को काट रहे हैं और प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। गौरतलब है कि बढ़ती जनसंख्या और जरूरत को दिखते हुए सरकार ने वनांचल में निवास करने वाले प्रत्येक ग्रामीणों को चार हेक्टेयर भूमि देने का नियम बनाया था।

CG News: तीन दशक से वनों पर हो रहा कब्जा: वन भूमि कब्जा करने का दौर पिछले तीन दशकों से तेजी से जारी है। इसमें कई परिवार ऐसे हैं जिनमें अलग अलग सदस्यों के नाम से जमीन हथिया लिया है। तीन सालों में ही करीब 3000 हेक्टेयर वन भूमि पर और कब्जा कर लिया गया है।

CG News: विभाग के मुताबिक अब तक जगदलपुर वन क्षेत्र में लगभग 32 हजार हेक्टेयर वन भूमि ग्रामीणों को दिया जा चुका है। इनके लिए भी ली गई वन भूमि: अस्पताल, डिस्पेंसरी, पेयजल योजना, वनग्रामों का कन्वर्जन, उद्योग, ऑप्टिकल फाइबर केबल, पाइपलाइन, पुनर्वास, स्कूल, विद्युतीकरण इत्यादि।

CG News: आरसी दुग्गा, मुख्य वन संरक्षक बस्तर: बस्तर के वनांचल में कुछ समय से वनभूमि पर काबिज लोगों को वन अधिकार पत्र वितरण किया गया था। सरकार द्वारा दिए गए पत्र कुछ अपात्रों को भी मिल गया है जिसकी जांच की जा रही है। वहीं वन क्षेत्र में कब्जा करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है।

CG News: 1980 में वन संरक्षण अधिनियम बनने के बाद से अब तक 10 लाख 26 हजार हेक्टेयर वन भूमि की श्रेणी बदली गई है। वहीं लोकसभा में पेश आंकड़ों के मुताबिक पूरे देश में पांच वर्षों में 90001.15 हेक्टेयर वन भूमि विकास कार्यों के नाम भेंट चढ़ गई। अप्रैल, 2018 से मार्च, 2023 तक सबसे अधिक वन भूमि सड़क व खनन के नाम पर ली गई।

CG News: वन अधिकार पत्र मिलने के बाद ग्रामीणों द्वारा पट्टा वाले भूमि पर पुराने पेड़ों की कटाई कर रहे हैं। ऐसे में बस्तर के जंगलों को काफी नुकसान पहुंच रहा है और वन का रकबा तेजी से घट रहा है। वन अधिनियम के तहत कार्रवाई करने जाने वाले वन विभाग के कर्मचारियों को ग्रामीणों के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है।

CG News: आंकड़ों के मुताबिक 2019 तक जगदलपुर वन वृत में ही 28, 350 हेक्टेयर वन भूमि पर ग्रामीणों का कब्जा हो चुका था । जिसमें वन समिति के अनुसंशा पर लगभग 16 हजार 754 ग्रामीणों को व्यक्तिगत और 694 लोगों को सामूहिक वन अधिकार प्रपत्र दिया जा चुका है।