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CG News: समय से जंग और नई जिंदगी का आगमन, महतारी एक्सप्रेस ने ऐसे बचाई मां-बच्चे की जान

CG News: खराब स्थिति देखते हुए उन्होंने नदी के तेज बहाव को पार करने के लिए मरीज के लिए एक बांस का स्ट्रेचर बनाया।

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महतारी एक्सप्रेस ने बचाई मां-बच्चे की जान (Photo source- Patrika)

महतारी एक्सप्रेस ने बचाई मां-बच्चे की जान (Photo source- Patrika)

CG News: बस्तर की घने जंगलों और नदियों से घिरी धरती पर एक ऐसी कहानी लिखी गई, जो मानवता, साहस, और समर्पण की मिसाल बन गई। बड़े बोदेनार गांव की लच्छो और उनके नवजात की जिंदगी को बचाने के लिए 102 महतारी एम्बुलेंस की टीम ने नदी के तेज बहाव को चुनौती दी और एक असंभव लगने वाली जंग जीत ली। यह कहानी न केवल एक मां और बच्चे की जिंदगी की जीत है, बल्कि उस समुदाय की एकजुटता और सेवा भाव की भी गवाही देती है, जिसने मुश्किल घड़ी में साथ दिया।

CG News: आपातकाल का कॉल और नदी की बाधा

5 अगस्त 2025 की सुबह 10.10 बजे, बस्तानार ब्लॉक के बड़े बोदेनार रोडपारा में रहने वाली पहली बार गर्भवती लच्छो के लिए 102 महतारी एम्बुलेंस के कॉल सेंटर में एक आपातकालीन कॉल आया। लच्छो को प्रसव पीड़ा शुरू हो चुकी थी, और हर पल कीमती था। लेकिन गांव तक पहुंचने का रास्ता प्रकृति की एक बड़ी चुनौती से रुका हुआ था—स्थानीय नदी में बारिश के कारण तेज बहाव था, जो एम्बुलेंस के लिए अभेद्य दीवार बन गया था।

इस मुश्किल स्थिति में 102 महतारी एम्बुलेंस के चालक उमेश वेट्टी ने हार नहीं मानी और पैदल ही स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलकर नदी पार कर दी। खराब स्थिति देखते हुए उन्होंने नदी के तेज बहाव को पार करने के लिए मरीज के लिए एक बांस का स्ट्रेचर बनाया। इसके बाद ग्रामीणों के सहयोग से नदी पार कर उस पार पहुंचे और वहां खड़ी महतारी में बैठाकर स्वास्थ्य केंद्र के लिए रवाना हुए।

संकट में एकजुट होकर दिया योगदान

लच्छो को सुरक्षित एम्बुलेंस तक लाने के बाद, वेट्टी ने बिना देरी किए उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बड़े किलेपाल पहुंचाया। वहां चिकित्सकों की टीम ने तुरंत कार्रवाई की और लच्छो ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।

CG News: इस सफल प्रसव ने न केवल लच्छो के परिवार में खुशी की लहर दौड़ाई, बल्कि उस समुदाय के लिए भी गर्व का क्षण बन गया, जिसने इस संकट में एकजुट होकर योगदान दिया। लच्छो के पति ने भावुक होकर कहा कि हमारी लच्छो और हमारे बच्चे को नया जीवन देने के लिए 102 की टीम और हमारे गांववालों का जितना शुक्रिया करें, उतना कम है। नदी ने हमें डराया, लेकिन उनकी हिम्मत ने हमें जीत दिलाई।