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CG News: शहर में कुत्तों की संख्या नियंत्रण योजना फेल, नसबंदी अभियान दो बार हुआ बेअसर

CG News: शहर में डॉग्स के लिए काम करने वाली संस्थाओं का कहना है कि शेल्टर कभी जगदलपुर जैसे छोटे शहर में सफल नहीं हो सकते।

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शहर में कुत्तों की संख्या कम करने के प्रयास विफल (Photo source- Patrika)

शहर में कुत्तों की संख्या कम करने के प्रयास विफल (Photo source- Patrika)

CG News: शहर में कुत्तों की संख्या कम करने के लिए नगर निगम ने दो बार नसबंदी के प्रयास किए। यह प्रयास दोनों बार फेल हो गए। ऐसा इसलिए क्योंकि जिन दो संस्थाओं के साथ इस काम के लिए टेंडर किया गया टेंडर की जय राशि निगम देने के लिए तैयार नहीं था। दोनों बार राज्य से तय संस्थाओं को काम दिया गया लेकिन स्थानीय स्तर पर इन संस्थाओं को आर्थिक रूप से सहयोग नहीं मिल पाया।

CG News: कुत्तों के लिए शेल्टर शुरू करने की पैरवी

पहली बार 700 रुपए प्रति डॉग और दूसरी बार 850 रुपए में काम तय हुआ लेकिन निगम दोनों बार यह राशि नहीं दे पाया। दूसरी बार तो 2000 कुत्तों की नसबंदी के लिए दुर्ग की संस्था को काम दिया गया। इस संस्था ने भी सिर्फ इसलिए काम छोड़ दिया क्योंकि नगर निगम टेंडर की शर्तों के अनुरूप भुगतान नहीं कर रहा था। पहली बार हैदराबाद की संस्था को काम दिया गया था उस संस्था ने भी शुरुआती पेमेंट में देरी के चलते काम छोड़ दिया।

इस तरह देखें तो नगर निगम की पिछली दो सरकारें कुत्तों की संख्या को कम करने को लेकर गंभीर नहीं थीं। अब मौजूदा शहर सरकार ने कुत्तों के लिए शेल्टर शुरू करने की पैरवी की है, जिसका खर्च नसबंदी से 20 गुना तक ज्यादा है। नसबंदी फेल होने की वजह के बारे में जानकारी लेने निगम प्रयास भी नहीं कर रहा है।

डॉग्स के लिए काम करने वाली संस्थाएं यह कह रहीं

CG News: शहर में डॉग्स के लिए काम करने वाली संस्थाओं का कहना है कि शेल्टर कभी जगदलपुर जैसे छोटे शहर में सफल नहीं हो सकते। शेल्टर में अगर 500 कुत्तों को भी रखा गया तो निगम व्यवस्था नहीं संभाल पाएगा। इस काम के लिए निगम को अलग से बजट नहीं मिलेगा, उसे अपने आय के स्त्रोत से ही शेल्टर का खर्च निकालना होगा। पहले से घाटे में चल रहे निगम के लिए यह काम आसान नहीं है। संस्थाओं का कहना है कि निगम को शेल्टर के बारे में बात करने से बचना चाहिए क्योंकि यह जगदलपुर में व्यवहारिक नहीं है।

शेल्टर में 100 डॉग पर महीने में 1.20 लाख का खर्च

नगर निगम प्रशासन ने साल 2017 में शहर के कुत्तों को पकड़ने के लिए एक छह सदस्यीय टीम बनाई। यह टीम वार्डों में घूम-घूमकर कुत्तों को पकड़ती थी और उन्हें ले जाकर शहर से दूर किसी सूनसान जगह पर छोड़ दिया जाता था। निगम के ही सूत्र बताते हैं कि उस वक्त शहर से बाहर छोड़े गए सभी डॉग्स कुछ दिन बाद ही वापस आने शुरू हो गए थे।

जब यह जानकारी तत्कालीन महापौर को मिली तो उन्होंने अभियान बंद करवा दिया था। मौजूदा शहर सरकार ने दिल्ली एनसीआर के लिए आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सराहते हुए कहा है कि यह फैसला जगदलपुर नगर निगम पर लागू हो तो यहां के डॉग्स को भी शेल्टर में रखा जाएगा।

व्यवस्था कैसे करेगा यह बड़ा सवाल है…

CG News: अगर जगदलपुर नगर निगम में यह काम शुरू होता है तो एक शेल्टर में एक डॉग पर प्रति माह 1200 रुपए का खर्च होगा। 100 डॉग्स पर 1 लाख 20 हजार खर्च होंगे। शहर में 5 हजार से ज्यादा कुत्ते सड़क पर घूम रहे हैं। इन्हें पकड़कर शेल्टर में रखा गया तो एक महीने का खर्च 60 लाख तक पहुंच जाएगा। ऐसे में सवाल उठता है कि निगम इस काम के लिए इतने पैसे कहां से लाएगा। नगर निगम कुत्तों की एक बार की नसबंदी के लिए 20 लाख तक खर्च नहीं कर पाया वह शेल्टर की व्यवस्था कैसे करेगा यह बड़ा सवाल है।