
CG News: छत्तीसगढ़ के जल संसाधन मंत्री केदार कश्यप से किसानों ने मुलाकात की और इंद्रावती नदी के सूखने के कारण उत्पन्न संकट पर चर्चा की। किसानों का कहना था कि इंद्रावती नदी का जल स्तर घटने से उनके खेतों में पानी की कमी हो गई है, जिससे सैकड़ों एकड़ में उगाई गई मक्का की फसल सूखने की कगार पर है।
किसानों ने मंत्री से मांग की कि तत्काल उनकी खड़ी फसलों को बचाने के लिए नाली के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जाए और समस्या के समाधान के लिए सरकार तत्काल कदम उठाए। इस बैठक में जल संसाधन मंत्री केदार कश्यप ने किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लिया और कहा कि वह उड़ीसा सरकार से इस मामले पर तत्काल बातचीत करेंगे।
उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार इस मुद्दे को प्राथमिकता से लेकर सिंचाई संकट को दूर करने के लिए कदम उठाएगी। मंत्री ने कहा कि जल स्थिति को सुधारने के लिए जल्द ही आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और किसानों को राहत देने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। कलेक्टर और जन संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक लेगे।
किसानों ने यह भी सुझाव दिया कि इंद्रावती नदी में स्थित सभी एनिकेटो (नदी जल के संचयन के स्थल) से 10 प्रतिशत पानी बस्तर क्षेत्र को दिया जाए, ताकि पानी की कमी दूर हो सके और बस्तर के किसानों की फसलों को सिचाई मिल सके।
किसानों ने मांग की कि इंद्रावती नदी के ऊपरी हिस्से में स्थित उड़ीसा के खाती गुड़ा बांध और भस्केल मैराज से पानी भेजा जाए ताकि पानी की कमी को दूर किया जा सके और फसलों को बचाया जा सके। यह दोनों बांध इंद्रावती नदी के जल स्रोत से जुड़े हुए हैं और उनके माध्यम से पानी की आपूर्ति की जा सकती है।
इसके साथ ही किसानों ने चित्रकोट विधायक विनायक गोयल मुलाकात की। जिसमें विधायक विनायक गोयल ने किसानों की समस्याओं को बारीकी से सुनी। उन्होने बस्तर कलेक्टर से फोन पर बात कर इंद्रावती नदी के सूखने को लेकर गंभीर चिंता जताई। इंद्रावती नदी, जो बस्तर जिले के किसानों और आम जनता के लिए जीवनदायिनी है, इन दिनों सूखती जा रही है, जिससे क्षेत्र में जल संकट गहरा गया है।
CG News: इस पर विधायक ने कलेक्टर से इस मुद्दे को लेकर समाधान खोजने की अपील की थी, लेकिन कलेक्टर का जवाब किसानों की चिंता को और बढ़ाने वाला था। कलेक्टर ने फोन पर स्पष्ट रूप से कहा कि इस समय नदी में पानी की आपूर्ति की कोई उम्मीद नहीं है, जिससे क्षेत्र में जल संकट को लेकर नाराजगी पैदा हो गई है। कलेक्टर के जवाब से नाखुश होकर विधायक ने कहा कि यह बेहद चिंताजनक स्थिति है।
बस्तर जैसे आदिवासी बहुल इलाके में जहां लोग मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर हैं, वहां पानी की कमी गंभीर समस्या बन गई है। किसानों को इस समय राहत की जरूरत है, न कि ऐसे निराशाजनक जवाब की। उन्होंने कहा कि यह कलेक्टर की जिम्मेदारी है कि वह सरकार से आवश्यक कदम उठाने की मांग करें, ताकि किसानों को राहत मिल सके।
किसानों ने कहा कि अगर इंद्रावती नदी का जल स्तर कम होने के कारण उनकी फसलें बर्बाद हो रही हैं, तो सरकार को तुरंत फसलों का सर्वे कराना चाहिए और प्रभावित किसानों को मुआवजा देना चाहिए। इससे किसानों को कुछ राहत मिल सकेगी, और वे अपनी समस्याओं से उबरने के लिए कदम उठा सकेंगे।
Published on:
27 Mar 2025 02:42 pm

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