
मिस मैनेजमेंट का शिकार हुई मगरमुंही रस्म
जगदलपुर। Chhattisgarh News: प्रसिद्ध दशहरा के लिए रथ निर्माण की तैयारियां प्रशासनिक कुप्रबंधन की शिकार होने लगी हैं। संसाधन और श्रमिकों का समय से प्रबंधन न करने का खामियाजा मंगलवार को मगरमुंही रस्म को भुगतना पड़ा। कारीगरों के अभाव में समय पर लोहे के गुड़दा तैयार नहीं हो सके, जिस कारण मंगलवार को यह रस्म नहीं निभाई जा सकी। रस्म पूरी न होने के कारण रथ निर्माण करने आए दर्जनों ग्रामीण भी सिरहासार भवन में पूरे दिन आराम करते रहे।
इंतजार करते रहे कारीगरों का
गुड़दा बनाने के लिए सिरहासार भवन के पास ही खुले मैदान में इन लोगों को स्थान दे दिया गया और भट्टी भी लगा दी गई थी। इस काम को करने वाले ग्रामीण टेकामेटा से आते हैं। यहां 12 लोगों की जरूरत थी, लेकिन यहां पहुंचे केवल चार लोग ही। आठ श्रमिक कम होने के कारण कार्य प्रभावित हो गया। बताया जाता है कि धौकनी भी सही नहीं थी। इसके चलते लोहे का कार्य प्रभावित हो गया। तय समय पर रस्म के लिए कुछ लोग पहुंचे भी, लेकिन तय संख्या में गुड़दा तैयार न होने के कारण रस्म नहीं निभाई जा सकी। अब यह रस्म बुधवार को होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। इधर कम संख्या में कारीगर व धौंकनी की व्यवस्था करने में दशहरा समिति के जिम्मेदान मौके पर ही नजर नहीं आए।
यह है गुड़दा का कार्य
रथ कारीगर देशराज के अनुसार रथ के प्रत्येक पहिया की ऊंचाई 96 अंगुल की होती है। पहियों के मध्य गुड़दा लगाने से पहले जो छेद किया जाता है वह भी 14 अंगुल वृत्ताकार निर्धारित है। पहले पहिया के मध्य बसूला-बिंधना से छेद किया जाता है, बाद में लोहे की गोल प्लेट को गर्म कर गुर्दा लगाया जाता है, इस कार्य में लोहार का करना होता है।
यह मगरमुंही रस्म
नारफोड़नी के बाद रथ के पहिया में छेद करने के बाद इनमें लोहे का गुड़दा लगाया जाएगा। गुड़दा लगाने की रस्म मगरमुंही के ठीक पहले होनी थी। इस रस्म में पहिया की पूजा के साथ बकरा, मांगूर मछली और अंडा की भेंट दी जाती है। मंगलवार को इस विधान को पूरा किया जाना था। इस विधान के बाद लकड़ी के रथ के चक्के में एक्सल बनने के बाद अचान में चार चक्के को रथ के साथ बैठाया जाता है।
Published on:
11 Oct 2023 01:19 pm

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