पहले प्रयास में असफलता मिली तो लगा आगे क्या होगा, लेकिन तब भी मां ने हौसला बढ़ाया। यही कारण है कि अपने दूसरे प्रयास में मैं यूपीएससी अच्छे रैंक के साथ क्लियर कर पाया। आज मैं उनकी वजह से ही आईपीएस हूं। आज भी मां मेरे हर फैसले मेरी प्रेरणा बनती हैं। उनका साथ बेहद खास है। वहीं दूसरे बेटे ने आईआईटी कानपूर में सेवा दी और वर्तमान में कैनेडा की प्रतिष्ठित कपनी में कार्यरत हैं। इस तरह एक मां ने अपने दोनों बेटों के लिए जो सपना देखा उसे साकार किया।0000