
बच्चों की शिक्षा स्वास्थ्य और सुपोषण की जांच के लिए बनी थी टीम, जानिए क्यों उसी पर आज उठ रहे सवाल
बोरगांव. हाल ही में जिला प्रशासन द्वारा शिक्षा (education), स्वास्थ्य (health) और सुपोषण (nutrition) की गुणवत्ता पर कसावट लाने सामाजिक अंकेक्षण की संयुक्त टीम गठित कर मॉनिटरिंग की बात की जा रही है। गौर करने वाली बात है कि आखिर इस प्रकार की टीम बनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी। अगर आज कोंडागांव जिला (Kondagaon News) देश भर के आकांक्षी जिलों में स्वास्थ्य और पोषण और अधोसंरचना विकास के मामले में देश भर में पहले पायदान पर है तो फिर इस टीम की जरूरत ही क्या और यदि ऐसा नही है तो इस प्रकार की टीम गठित करने के बजाय शिक्षण संस्थानों और आंगनवाड़ी केन्द्रों को साधन संसाधनों से परिपूर्ण किया जाए। खाली पड़े पदों को भरने चाहिए। स्कूल में बच्चों के बैठने के लिए बैठक व्यवस्था हो शिक्षकों को समय समय पर लगाए जाने वाले गैर शिक्षकीय कार्यों से मुक्त रखें। इसी तरह पोषण के मामले में बात करें तो हमारे यहां के अधिकांश सुपोषण केंद्र कहे जाने वाले आंगनवाड़ी केन्द्र ही कुपोषण के शिकार हैं। कही भवन नही है एक हीं है तो जर्जर हाल में है, बिजली पानी आदि का अभाव है ।
कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए
ऐसे में इस तरह की किसी भी स्तर की टीम गठित कर सुधार लाने की बात सोचना भी बेमानी है। बता दें कि इससे पहले भी तत्कालीन कलक्टर द्वारा जिले में सुपोषण के लिए द्वार जोहार, अभियान की पहल की गई थी जिसमें अन्य विभागों के अधिकारी कर्मचारियों के साथ जन प्रतिनिधियों को भी जिम्मेदारी दी गई थी लेकिन यह योजना भी कुछ दिन चलने के बाद ठंडे बस्ते में चली गई। यदि जिले में शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण विभाग के अधिकारी कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों के प्रति गंभीर नही हैं तो ऐसे में जिला प्रशासन द्वारा इस प्रकार की टीम गठित करने के बजाय संबंधित विभाग के लापरवाह अधिकारी कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि सभी अपनी जिम्मेदारी का गंभीरता से निर्वहन करें तो निश्चित तौर पर शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में आश्चर्य जनक परिणाम देखने को मिलेंगे ।
जिला प्रशासन की नवगठित टीम गुणवत्ता सुधारने की आवश्यकता अंदरूनी क्षेत्रों में
जिले में कुल 1992 पाठ शालायें संचालित हो रही हैं जिनमे हाई स्कूल 64, हायर सेकेंडरी 94 माध्यमिक शाला 607, प्राथमिक शाला 1227 है वहीं अंदरूनी क्षेत्रो के स्कूलो में आज भी स्कूल भवन, पेयजल समस्या, शौचालय, बाउंड्री वॉल जैसे अन्य मूलभूत सुविधाओ से विद्यार्थी महरूम हैं । उस पहुंच विहीन जगहों पर जिला प्रशासन की नवगठित टीम क्या बेहतर परिणाम के साथ काम कर पायेगा।
शिक्षा विशेषज्ञों से लैस होनी थीं टीम
बहरहाल जिला प्रशासन द्वारा टीम तो गठित कर दी गई है लेकिन अब देखने वाली बात होगी कि यह टीम शिक्षा और सुपोषण के मामले में कितना सुधार कर पाती है या फिर ठंडे बस्ते में चली जाती है। जिले में सेवानिवृत्त शिक्षा विशेषज्ञों की कोई कमी नही है जिनकी सेवाएं जिला प्रशासन ले सकता था तथा वे शिक्षकीय गुणवत्ता सुधारने में बेहतर योगदान दे सकते थे। जिसके लिए इन्हें संकुल स्तर पर मॉनिटरिंग के लिए दायित्व सौंपा जा सकता था।
Published on:
08 Aug 2019 03:40 pm
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