4 जून 2026,

गुरुवार

Patrika Logo

Poultry Farming Business: माता-पिता का सहारा बनीं रत्ना ठाकुर, मुर्गीपालन से खड़ा किया लाखों का कारोबार

Bihan Yojana Chhattisgarh: बस्तर जिले की रत्ना ठाकुर ने मुर्गीपालन, दाना निर्माण और आधुनिक खेती के जरिए आत्मनिर्भर बनकर ‘लखपति दीदी’ की पहचान बनाई है।

2 min read
Google source verification
Poultry Farming Business

माता-पिता का सहारा बनीं रत्ना ठाकुर (photo source- Patrika)

Poultry Farming Business: मेहनत, नवाचार और आत्मविश्वास से जिंदगी की तस्वीर बदली जा सकती है, इसकी प्रेरणादायक मिसाल पेश की है बस्तर जिले के तोकापाल विकासखंड के छोटे से ग्राम टिकरा धनोरा की रहने वाली रत्ना ठाकुर ने। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर रत्ना आज न सिर्फ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि क्षेत्र की कई महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन चुकी हैं। मुर्गीपालन, दाना निर्माण और आधुनिक खेती के जरिए उन्होंने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है और आज वह ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बना चुकी हैं।

Poultry Farming Business: मुर्गीपालन से शुरू हुआ आत्मनिर्भरता का सफर

रत्ना ठाकुर ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से वह इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर के माध्यम से मुर्गीपालन के लिए दाना तैयार कर रही हैं। शुरुआत छोटे स्तर से हुई थी, लेकिन मेहनत और गुणवत्ता के दम पर आज उनके द्वारा तैयार दाने की मांग बस्तर संभाग के कई जिलों तक पहुंच गई है। स्थानीय कुक्कुटपालकों के अलावा दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जैसे जिलों में भी उनके तैयार किए गए दाने की सप्लाई हो रही है। इस कार्य से उन्हें नियमित और स्थायी आय प्राप्त हो रही है।

चूजों के पालन से बढ़ी आय

रत्ना केवल दाना निर्माण तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने ब्रूडिंग चूजों के पालन-पोषण का कार्य भी शुरू किया। वह छोटे चूजों को पालकर बड़ा करती हैं और बाद में होटल, ढाबों और स्थानीय व्यापारियों को उनकी सप्लाई करती हैं। इस व्यवसाय ने उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है। ग्रामीण क्षेत्र में रहते हुए उन्होंने यह साबित कर दिया कि सीमित संसाधनों के बावजूद सही योजना और मेहनत से बड़ा कारोबार खड़ा किया जा सकता है।

मल्चिंग तकनीक से सब्जी खेती में सफलता

रत्ना ने खेती में भी आधुनिक तकनीकों को अपनाया है। करीब दो एकड़ भूमि पर वह मल्चिंग विधि से साग-सब्जियों की खेती कर रही हैं। इस तकनीक से उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ लागत में भी कमी आई है। खेती से उन्हें हर माह 15 से 20 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। पशुपालन और खेती आधारित इन गतिविधियों ने उनके परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया है।

परिवार बना सबसे बड़ी ताकत

रत्ना बताती हैं कि वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं और उन्हीं के साथ रहती हैं। उनके पति पदमलाल ठाकुर हर कदम पर उनका पूरा सहयोग करते हैं। परिवार के सामूहिक प्रयासों और आयमूलक गतिविधियों से होने वाली कमाई के बल पर उन्होंने एक स्कूटी खरीदी है और वर्तमान में चार कमरों का पक्का मकान भी बनवा रही हैं।

Poultry Farming Business: महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

रत्ना ठाकुर की सफलता आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और अवसर मिले तो वे न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि अपने परिवार और समाज की आर्थिक स्थिति बदलने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। बिहान योजना से जुड़कर रत्ना ने जिस तरह अपने जीवन में बदलाव लाया है, वह बस्तर की अन्य महिलाओं के लिए भी उम्मीद और आत्मविश्वास की नई कहानी बन गई है।