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Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में शादी समारोहों पर सख्ती, डीजे, अंग्रेजी शराब और फिजूलखर्ची पर पूरी तरह प्रतिबंध

Chhattisgarh News: फिजूलखर्ची पर पूरी तरह से रोक लगाने का फैसला लिया गया है। प्रशासन और समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य सामाजिक सुधार, सादगी और अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण लाना है।

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अंग्रेजी शराब और फिजूलखर्ची पर पूरी तरह प्रतिबंध (Photo AI)

Chhattisgarh News: धुरवा आदिवासी समाज बस्तर संभाग की विशेष बैठक शनिवार को जगदलपुर के तेतरकुटी स्थित सामाजिक भवन में आयोजित हुई। बैठक में समाज के 20वें स्थापना दिवस समारोह की समीक्षा करते हुए सामाजिक सुधार और सांस्कृतिक संरक्षण को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए। समाज ने शादी-विवाह में बढ़ती फिजूलखर्ची रोकने के लिए डीजे, अंग्रेजी शराब और अनिवार्य कपड़ा वितरण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। समाज पदाधिकारियों ने बताया कि यह निर्णय समाज को कर्ज के बोझ से बचाने और पारंपरिक संस्कृति को संरक्षित रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

Chhattisgarh News: लाखों रुपए की अनावश्यक खर्ची बची

धुरवा समाज पिछले 20 वर्षों से एकरूप सामाजिक व्यवस्था लागू किए हुए है और अब नियमों का कड़ाई से पालन कराने पर जोर दिया जाएगा। जानकारी के मुताबिक अब तक समाज द्वारा 217 जोड़ों का सामूहिक विवाह कराया जा चुका है, जिससे लाखों रुपए की अनावश्यक खर्ची बची है। बैठक में तय किया गया कि विवाह समारोहों में तेज आवाज वाले डीजे पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। इसके स्थान पर पारंपरिक वाद्ययंत्र जैसे ढोल, टामक, टूड़बूड़ी, बांसुरी और जलाजल को बढ़ावा दिया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर आर्थिक जुर्माने के साथ सामाजिक दंड का भी प्रावधान रखा गया है।

दिखावे के लिए महंगे कपड़ों की परंपरा समाप्त

समाज ने शादी में दिखावे के लिए महंगे कपड़ों और उपहार वितरण की परंपरा समाप्त करने का निर्णय लिया है। सादगीपूर्ण विवाह को प्रोत्साहित किया जाएगा। समाज के अनुसार धुरवा आदिवासी परंपरा में दहेज प्रथा नहीं है, बल्कि वधू मूल्य परंपरा प्रचलित है, जिसमें वर पक्ष द्वारा वधू परिवार को सम्मान स्वरूप सहयोग दिया जाता है। बैठक में शराबबंदी पर भी कड़ा रुख अपनाया गया। निर्णय लिया गया कि सामाजिक कार्यक्रमों में शराब का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। केवल पारंपरिक देवी-देवताओं की पूजा में समाज प्रमुखों की अनुमति से सीमित उपयोग किया जा सकेगा।

इसके अलावा समाज के पदाधिकारियों द्वारा नियम विरुद्ध कार्य करने, राजनीतिक हस्तक्षेप करने या सामाजिक मंच का राजनीतिक दबाव के लिए उपयोग करने पर दंडात्मक कार्रवाई का निर्णय लिया गया। दोषी पाए जाने पर पद से हटाने तक की कार्रवाई की जाएगी। बैठक में अधिकारी-कर्मचारी प्रकोष्ठ गठन के लिए 24 मई को संभाग स्तरीय बैठक आयोजित करने तथा 9 जून को नई संभागीय कार्यकारिणी गठन का भी निर्णय लिया गया। समाज ने शिक्षा को अनिवार्य बनाने, सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और युवाओं को सामाजिक समरसता से जोडऩे पर विशेष जोर दिया। धुरवा समाज बस्तर संभाग के महासचिव डॉ. गंगाराम कश्यप ‘धुर’ ने कहा कि समाज अपनी संस्कृति और परंपराओं को बचाते हुए सामाजिक सुधार की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।