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50 साल में महिलाओं ने बदली बस्तर की किस्मत, क्या इस बार टूटेगा रिकॉर्ड? सियासी समीकरण से जानें हाल

Lok Sabha Election News: राजनीतिक दल भी इस ट्रेंड को समझते हैं और महिलाओं को रिझाने के लिए उनके पास अलग स्ट्रेटजी होती है। प्रचार की रणनीति बनाते वक्त भी पार्टियां इस बात का ध्यान रखती हैं कि इस सीट पर महिला वोटरों की संख्या अधिक है और इसी आधार पर कार्यक्रम तय किए जाते हैं।

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Lok sabha chunaav 2024: प्रदेश में बस्तर लोकसभा ऐसी सीट है जहां पिछले 53 साल से महिला वोटर ही तय कर रही हैं कि उनका सांसद कौन होगा। महिला वोटरों की संख्या यहां हर साल बढ़ती गई है। मतदान में महिलाओं की भागीदारी भी यहां पुरुषों के मुकाबले ज्यादा रही है। दूरस्थ इलाकों में भी महिला वोटर मतदान के लिए बाहर निकलती हैं। सालों से बस्तर में यह ट्रेंड चलता आ रहा है।

राजनीतिक दल भी इस ट्रेंड को समझते हैं और महिलाओं को रिझाने के लिए उनके पास अलग स्ट्रेटजी होती है। प्रचार की रणनीति बनाते वक्त भी पार्टियां इस बात का ध्यान रखती हैं कि इस सीट पर महिला वोटरों की संख्या अधिक है और इसी आधार पर कार्यक्रम तय किए जाते हैं। बस्तर लोकसभा में आठ विधानसभा नारायणपुर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, कोंडागांव और बस्तर, जगदलपुर और चित्रकोट शामिल हैं। इन सभी सीटों पर महिला वोटरों की संख्या पुरुषों के मुकाबले में कहीं कम कहीं मामूली रूप से ज्यादा है। इस बार यहां 14 लाख 66 हजार 337 वोटर हैं। जिनमें महिला मतदाता 7 लाख 68 हजार 88 और पुरुष मतदाता 6 लाख 98 हजार 197 हैं। थर्ड जेंडर वोटरों की संख्या 52 है।

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बस्तर लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाले आठों विधानसभा में ग्रामीण महिलाओं की संख्या अधिक है। यह महिलाएं ग्रामीण जीवनशैली का हिस्सा हैं। इनका जीवन खेती-किसानी और हाट बाजार के बीच बनी वित्तीय व्यवस्था के बीच व्यतीत होता है। ऐसे में इन महिलाओं की चुनाव में अहम भूमिका होती है। गांवों में महिलाएं ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं होती हैं, इसलिए प्रत्याशी यहां महिलाओं से रूबरू होकर अपनी बात रखकर वोट मांगते हैं।

बस्तर में महिला वोटरों की संख्या अधिक होने की वजह से ही प्रत्याशी महिलाओं पर ही सबसे ज्यादा खर्च करते हैं। महिलाओं को रिझाने के लिए प्रत्याशियों को साड़ी से लेकर पायल तक की व्यवस्था करनी पड़ती है। बस्तर की चुनावी परंपरा में अब यह आम बात है।

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महतारी वंदन योजना की चर्चा इस चुनाव में खूब हो रही है। बस्तर के सुदूर वनांचल में रहने वाली महिलाएं इससे वंचित बताई जाती हैं। भाजपा महिला वोटरों के बीच इस योजना को पूरी तरह से कैश करती दिख रही है तो वहीं कांग्रेस सत्ता में आने पर सालाना एक लाख देने का वादा कर रही है। इस तरह देखें तो भाजपा और कांग्रेस दोनों के चुनावी प्रचार में महिलाएं केंद्र में हैं।