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World Mountain Day: रिटायरमेंट की उम्र में बस्तर के किशोर पहले व्यक्ति, जिसने हिमालय की 15 हजार फीट की उंचाई में लहराया तिरंगा

World Mountain Day: किशोर पारेख ने उत्तराखंड की पांगर्छुल्ला चोटी पर तिरंगा लहराया है। छह दिन तक लगातार माइनस 7 डिग्री में बर्फीली पहाड़ियों पर चढ़ाई करके उन्होंने उत्तराखंड की सबसे उंची चोटियों में से एक पांगर्चुल्ला चोटी को फतह किया।

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World Mountain Day

World Mountain Day: आज के दौर में जहां 60 की उम्र आते आते लोग अपने इच्छाओं को खत्म कर देते हैं और आराम से अपनी जिंदगी जीने पर जोर देते हैं वहीं बस्तर के किशोर पारख इस उम्र में अपने सपनों को पंख देने के लिए पहाड़ों की चढ़ाई कर रहे हैं। एक साल ही उन्होंने ऐसा रिकार्ड बनाया है जो बस्तर संभाग में अब तक किसी ने नहीं किया और उन्होंने हिमालयन रेंज की पांगर्चुल्ला चोटी को फतह कर वहां तिरंगा लहरा दिया।

उनका यह काम उनके हौंसलों को तो बताता ही है साथ ही ऐसे लोगों के लिए वे प्रेरणा भी हैं जो 60 की उम्र आते आते अपनी चाहतों को अपने मन में ही दबाकर रख लेते हैं। विश्व माउंटेन दिवस पर पत्रिका ऐसे ही 61 वर्षीय किशोर पारख से चर्चा की और जाना कि कैसे उन्होंने यह लक्ष्य हासिल किया।

World Mountain Day: बचपन का सपना अब पूरा हुआ

किशोर पारख बताते हैं कि उनका बचपन से ही सपना था कि हिमालयन रेंज की किसी एक चोटी पर वे चढ़े। लेकिन लिंक कभी नहीं मिल पाया। काई मार्गदर्शन नहीं था कि आखिर इसे कैसे किया जाए। (Chhattisgarh News) लेकिन उनके सपनों को पंख तब लगी जब उनका ही एक दोस्त जो मैसूर का है उसने हिमालयन रेंज की चोटी में चढ़ाने वाले कैंप को स्थापित किया। इसी बीच बस्तर की माउंटेनर नैनासिंह धाकड़ भी एवरेस्ट फतह कर वापस लौट चुकी है। उनसे संपर्क करके उन्होंने अपने बचपन के सपने को पूरा कर लिया।

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15 हजार फीट पर माइनस 7 डिग्री टेमप्रेचर

किशोर पारेख ने उत्तराखंड की पांगर्छुल्ला चोटी पर तिरंगा लहराया है। दरअसल यह कोई आम चढ़ान नहीं थी। छह दिन तक लगातार माइनस 7 डिग्री में बर्फीली पहाडिय़ों पर चढ़ाई करके उन्होंने उत्तराखंड की सबसे उंची चोटियों में से एक पांगर्चुल्ला चोटी को फतह किया। चोटी पर चढ़ाई का अभियान 5 और 6 मई के दरम्यान रात्रि 1 बजे शुरू किया। बेस कैप से लगभग 6 किमी की ऊंची चढ़ाई कर छठवें दिन उनके दल ने अपना लक्ष्य हासिल किया और 15 हजार फीट से ज्यादा ऊंचाई पर स्थित पांगर्चुल्ला पर चढऩे में सफलता प्राप्त की।

200 से अधिक किमी की पदयात्रा की

World Mountain Day: जगदलपुर शहर के किशोर पारेख समाजसेवी है। वे बस्तर हित में चल रहे सभी आंदोलन में अहम भूमिका में रहते हैं। इससे पहले वे इंद्रावती बचाओ मंच के साथ करीब 100 से अधिक किमी पैदल चलकर लोगों को जागरूक कर चुके हैं। वहीं रावघाट रेल लाइन की बस्तर की बहुप्रतिक्षित मांग के लिए भी अंतागढ़ से जगदलपुर तक पैदल मार्च में प्रथम लाइन पर रहे। इस दौरान उन्होंने 200 से अधिक किमी की पदयात्रा की थी। आज वे भी बस्तर हित से जुड़े तमाम आंदोलनों और समाजसेवा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं।