5 सितंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

जलदाय विभाग में जालसाजी कर 1 करोड़ 39 लाख का गबन

1 करोड़ 39 लाख 567 रुपए की सरकारी राशि का किया गबन
3 min read
Google source verification

जयपुर
जलदाय विभाग में मानवीय संवेदनाओं और नियम कायदों को ताक में रखकर 1 करोड़ 39 लाख 567 रुपए की सरकारी राशि के गबन का मामला सामने आया है। मिलीभगत और जालसाजी से ना केवल मृतक कर्मचारियों का वेतन सरकारी खजाने से उठा लिया गया बल्कि कुछ कर्मचारियों को रिटायर एवं मृत्यु के बावजूद भी वेतन का भुगतान किया गया। एरियर, डबल वेतन, पीएल के अधिक भुगतान समेत अन्य के नाम पर यह गड़बड़झाला किया गया। फर्जीवाड़े का यह सब खेल हुआ विभाग के जयपुर शहर उपखंड प्रथम दक्षिण के जवाहर नगर स्थित सहायक अभियंता कार्यालय में कार्यरत अधिकारी और बाबूओं की मिलीभगत से। गबन की कुल राशि में से 1 करोड़ 05 लाख से अधिक राशि मामले में दोषी पाए गए दो बाबूओं दीपक कुमार विजय और ज्ञानचंद मीणा के खातों में जमा पाई गई। वेतन के अतिरिक्त यह राशि इन दोनों बाबूओं के खातों में अक्टूबर 2014 से मार्च 2017 की अवधि में क्रेडिट हुई। विभागीय जांच में यह सारा खुलासा हुआ है।

इस गबन में कुछ मृतक कर्मचारियों के नाम पर भुगतान उठाया गया लेकिन भुगतान उनके आश्रितों को नहीं किया। इस राशि को कार्यालय के कर्मचारी अपने खाते में लेकर चुपचाप डकार गए। एक बाहरी व्यक्ति के खाते में भी गलत तरीके से सरकारी राशि का भुगतान किया गया। इतना ही नहीं 5 से 10 साल तक गैरहाजिर रहे कार्मिक को पुनरीक्षित वेतनमान और चयनित वेतनमान स्वीकृत करवाकर अनुस्थित अवधि का एरियर का भुगतान कर भी सरकारी कोष को चपत लगाई गई। मामले की जांच के लिए जब संबंधित कार्यालय से रिकॉर्ड मांगा गया तो रिकॉर्ड गायब होने की बात कहते हुए जवाहरनगर थाने में एफआईआर के लिए पत्र तक लिख दिया गया। हालांकि इस मामले में संबंधित डिवीजन कार्यालय के तत्कालीन एक्सईएन, बाबू और सहायक लेखा अधिकारी की जांच नहीं कर उन्हें बचाने की बात भी कही जा रही है।

विभाग को मिली थी शिकायत
जवाहर नगर कार्यालय के एक कर्मचारी ने अपना नाम गुमनाम रखते हुए विभाग के प्रमुख शासन सचिव को इस मामले की शिकायत की थी। इसके बाद 4 दिसंबर 2017 से जांच शुरू की गई। एईएन कार्यालय में कार्यरत तकनीकी एवं गैर तकनीकी कर्मचारियों के एक अप्रेल 2007 से 31 मार्च 2017 तक उठाए गए वेतन, एरियर, अवकाश काल के वेतन के भुगतान रिकॉर्ड की जांच की गई।

इस तरह किया गड़बड़झाला
कुछ कार्मिकों को पीएल का अधिक भुगतान किया गया। भुगतान बाहरी व्यक्ति और दूसरे कार्मिकों को किया गया। कुछ कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति होने के बाद वेतन आहरित किया गया। इसके साथ ही गलत तरीके से वेतन एवं एरियर उठाया गया। कुछ कार्मिकों की मृत्यु के बाद वेतन उठा लिया गया। मृतक की पीएल राशि का आहरण भी किया गया।
मामले की जांच रिपोर्ट कुल 25 कार्मिकों के नाम हैं, जिन्हें दोषी मानते हुए इनके नाम पर रिकवरी निकाली गई है।

रिपोर्ट में ये माने गए दोषी
जांच रिपोर्ट में जवाहरनगर कार्यालय के तत्कालीन विजय पारीक, एईएन एन.के वर्मा और वर्तमान सहायक अभियंता रजनीश बैरवा को दोषी माना गया है। इनके साथ ही तत्कालीन बिल लिपिक दीपक कुमार विजय, संस्थापन लिपिक ज्ञानचंद मीणा और सहायक रमेश चंद मीणा को दोषी माना गया है। उप वित्तीय सलाहकार भगवानाराम कुलदीप के मार्ग निर्देशन में यह जांच कर रिपोर्ट विभागीय अधिकारियों को सौंप दी गई है।
25 कार्मिकों के नाम पर रिकवरी
रिटायर्ड पंप चालक कैलाश चंद वर्मा, रिटायर्ड सहायक मूलचंद सैनी, रिटायर्ड पंप चालक सेवाराम, रिटायर्ड पंप चालक गोपाल सिंह, रिटायर्ड मी.नि. मदनलाल रैगर, मृतक दरबान सिंह, मृतक डूंगर सिंह, मृतक श्रवण सिंह, सत्यनारायण विजय मी.नि., बद्रीलाल मीणा, पप्पूलाल, सुवालाल, लक्ष्मण महावर, किशन शर्मा, जगदीश नारायण मीणा, रमेश चंद मीणा, श्योराम मीणा, सीताराम चवरिया, मृतक इकबाल, कजोड़, गोविंद सिंह, छोटूराम मीणा, कनिष्ठ लिपिक दीपक विजय, वरिष्ठ लिपिक ज्ञानचंद मीणा और बाहरी व्यक्ति गिर्राज मीणा के नाम सूची में शामिल कर रिकवरी निकाली गई है।