
zika virus
जयपुर। राजधानी जयपुर में जीका वायरस पॉजीटिव मरीजों का शतक पूरा होने के बाद भी जीका वायरस का कहर जारी है। अब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भी जीका वायरस ने अपना निशाना बनना शुरू कर दिया है। आज सुबह स्वास्थ्य विभाग में जयपुर में तैनात अधिकारी को जीका पॉजीटिव होने की पुष्टि हुई है। हालांकि विभाग के अधिकारी मामले को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं। सूत्रों के अनुसार राजधानी जयपुर में अभी तक 115 जीका पॉजीटिव मरीज सामने आ चुके हैं, लेकिन विभाग केवल 94 मरीज ही बता रहा है।
मुरलीपुरा क्षेत्र में परिवार रहता है अफसर
सूत्रों के अनुसार स्वास्थ्य विभाग के जयपुर जोन में तैनात अधिकारी मुरलीपुरा क्षेत्र में परिवार सहित रह रहे हैं। बीते कई दिनों से वे बीमार चल रहे थे और बुधवार को अन्य जांचों के साथ उन्होंने जीका वायरस की भी जांच करवाई। आज सुबह जांच रिपोर्ट आने के बाद इस अधिकारी को जीका होने की पुष्टि हुई है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमें शास्त्री नगर क्षेत्र में पहुंच गई और घर-घर सर्वे शुरू किया गया। अधिकारी के घर से तीन किलोमीटर के क्षेत्र में लार्वा को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
बिना संसाधनों का नियंत्रण कक्ष
जीका का सबसे पहला मरीज शास्त्री नगर में सामने आया। विभाग ने पूरे संसाधन शास्त्री नगर में झोंकने की बात कही। लेकिन केन्द्रीय टीम के सामने विभाग के कुप्रबंध की पोल खुलती चली गई। बुधवार को विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव वीनू गुप्ता की अध्यक्षता में स्वास्थ्य भवन में जीका समीक्षा बैठक में केन्द्रीय टीम के अतिरिक्त निदेशक डॉ. नीरज धींगरा ने अव्यवस्थाओं पर जबरदस्त नाराजगी जताई। धींगरा ने कहा कि शास्त्री नगर में जो नियंत्रण कक्ष बनाया गया है, उसमें संसाधन ही नहीं है। अव्यवस्थाओं के ऐसे हालात उन्होंने कहीं नहीं देखे।
दस दिन से जिम्मेदार नहीं गए फील्ड में
विभाग के अधिकारियों की माने तो जीका की मॉनिटरिंग की सबसे बड़ी जिम्मेदारी विभाग के निदेशक डॉ. वीके माथुर और अतिरिक्त निदेशक डॉ. रवि प्रकाश माथुर की है, लेकिन दोनों ही अधिकारी बीते दस दिन से जीका के हालातों को देखने के लिए फील्ड में नहीं गए हैं, जबकि नियमित तौर पर दोनों ही अधिकारियों को फील्ड में जाना था।
Updated on:
18 Oct 2018 11:33 am
Published on:
18 Oct 2018 11:29 am
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