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हवामहल में प्रदर्शनी ने खींचा लोगों का ध्यान, कला प्रेमियों के लिए बनी आकर्षण, हर पत्थर में छिपी कहानी को रंगों से किया गया बयां

प्रदर्शनी में 40 से अधिक पेबल आर्ट वर्क्स प्रदर्शित किए गए हैं।

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जयपुर। हवा महल स्थित एग्जीबिशन हॉल इन दिनों एक अनोखी कला प्रदर्शनी का साक्षी बना हुआ है, जहां साधारण पत्थरों को रंगों और भावनाओं के माध्यम से जीवंत कलाकृतियों में बदलने की अद्भुत कला देखने को मिल रही है। प्रदर्शनी में 40 से अधिक पेबल आर्ट वर्क्स प्रदर्शित किए गए हैं। इन कलाकृतियों में साधारण दिखने वाले पत्थरों को इस तरह सजाया और संवारा गया है कि वे जीवंत प्रतीत होते हैं। हर एक आर्टवर्क अपने आप में एक कहानी कहता नजर आता है।

कलाकार राजकुमार गुप्ता ने बताया कि हर पत्थर के भीतर एक अनकही कहानी और भावनाएं छिपी होती हैं, जिन्हें पहचानकर रंगों के जरिए बाहर लाना ही असली कला है। उनकी यह सोच उनकी हर रचना में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।प्रदर्शनी में प्रदर्शित कलाकृतियों का मुख्य आकर्षण भावनात्मक विषय हैं। इनमें मां और बेटे के स्नेह को दर्शाती रचना विशेष रूप से लोगों का ध्यान खींच रही है, जिसमें बच्चे की मासूमियत और मां की ममता को बेहद सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसके अलावा प्रेम पर आधारित कलाकृतियां भी दर्शकों को पुरानी यादों में ले जाती हैं, वहीं एक युवा की गहरी सोच को दर्शाती रचना आधुनिक जीवन के भावनात्मक पहलुओं को उजागर करती है।

इन कलाकृतियों की सबसे बड़ी खासियत उनकी बारीकी और सजीवता है। पहली नजर में यह विश्वास करना कठिन हो जाता है कि ये सिर्फ साधारण पत्थरों से बनी हैं। रंगों का संयोजन और भावनाओं की अभिव्यक्ति इतनी प्रभावशाली है कि दर्शक कुछ समय के लिए इन कलाकृतियों के सामने ठहरने को मजबूर हो जाते हैं।

पेबल आर्ट साधारण पत्थरों को रंगों और कल्पना से जीवंत रूप देने की अनोखी कला है। इसमें कलाकार छोटे पत्थरों पर भावनाएं, रिश्ते और कहानियां उकेरता है। कम संसाधनों में तैयार यह कला पर्यावरण के अनुकूल भी होती है और हर आयु वर्ग को आकर्षित करती है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में मार्च 2026 में नोएडा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में भी कृतियों को काफी सराहना मिली थी। अब जयपुर में आयोजित यह प्रदर्शनी स्थानीय कला प्रेमियों और पर्यटकों के लिए एक विशेष आकर्षण बन गई है और कला के प्रति लोगों की रुचि को भी बढ़ावा दे रही है।