
जयपुर . गर्मी में कुछ लोग एयरकंडीशनर को थोड़ी देर के लिए 16-18 सेल्सियस पर चलाते हैं और फिर बंद कर देते हैं। ऐसा बार-बार करना नुकसानदायक होता है। ऐसा न करें क्योंकि शरीर का तापमान 36-37 सेल्सियस रहता है। ऐसे में अचानक से ठंड लगती है और शरीर का मेटाबोलिज्म बिगड़ जाता है और व्यक्ति बीमार हो जाता है। बच्चों पर इसका ज्यादा दुष्प्रभाव पड़ता है क्योंकि उनकी इम्युनिटी कम होती है। इससे बचने के लिए एसी को 25 डिग्री सेल्सियस पर लगातार चलाते रहें तो बच्चे बीमार होने से बचे रहेंगे। ऐसी को 25 से कम पर नहीं चलाना चाहिए।
सुबह -शाम नहलाएं
फ्रिज के पानी की जगह मटके का पानी पिलाएं। बाहर भेजते समय बच्चों को पूरे कपड़े पहनाएं और सिर पर सूती कपड़ा रखें या टोपी पहनाएं। बच्चों को कोई समस्या न हो इसलिए उन्हें सुबह-शाम नहलाना चाहिए। इससे भी गर्मी में होने वाली कई बीमारियों से बचाव होता है।
इमली का पना और नींबू शिकंजी रोज दें
बच्चों को तरल पदार्थ ज्यादा दें। इमली या कच्चे आम का पना, छाछ, नारियल पानी, टमाटर का सूप, राबड़ी और नींबू की शिकंजी रोज दें। बच्चों को दिन में पांच बार खाना खिलाएं। इनमें नाश्ते और लंच में हैवी डाइट शामिल हो जबकि नाश्ते और लंच के बीच एक मौसमी फल, शाम को और डिनर में हल्का स्नैक्स दें। रात में दूध दे सकते हैं। जो प्याज खाते हैं वो प्याज खाएं। इससे भी गर्मी में मेटाबोलिज्म ठीक रहता है।
इन रोगों की आशंका
डॉ. आलोक उपाध्याय शिश रोग विशेषज्ञ, जेके लोन अस्पताल ने कहा की तापमान बढऩे से बच्चों में सबसे अधिक खतरा डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी), हीट स्ट्रोक (लू) और शरीर में लवण की कमी का रहता है। इससे बच्चों की तबियत अचानक से बिगडऩे लगती है। इस कारण उनको चक्कर आना, बेहोशी छाना, ज्यादा प्यास लगना, बुखार और पसीना न आने की दिकक्त होती है। पसीना न आने से शरीर का तापमान गड़बड़ाने लगता है। वहीं, गर्मी में खानपान में लापरवाही के कारण पेट दर्द, फूड पॉइंजनिंग आदि की समस्या हो सकती है। बच्चों में उल्टी-दस्त की शिकायत भी देखने में आती है।
Published on:
12 May 2018 02:31 pm
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