
फाइल फोटो
जयपुर. कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने गहलोत के इंटरव्यू को सचिन पायलट के खिलाफ नहीं बता कर कांग्रेस नेतृत्व के विरुद्ध बताया है। सचिन सर्मथक माने जाने वाले प्रमोद कृष्णम ने कहा कि गहलोत, अडाणी के इशारे पर राहुल की यात्रा को पलीता लगाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने नसीहत दी कि बड़ा दिल दिखाते हुए गहलोत को मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ देनी चाहिए। नया मुख्यमंत्री कौन होगा यह विधायक और कांग्रेस नेतृत्व मिल कर तय कर लेगा।
इससे पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सचिन पायलट पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोला है। उन्होंने सचिन को साफ तौर पर गद्दार बताते हुए सवाल उठाया कि प्रदेश का अध्यक्ष रहते हुए जिसने पार्टी से बगावत की वह कैसे सीएम बन सकता है? अपने साक्षात्कार में गहलोत ने कई खुलासे भी किए।
पच्चीस सितम्बर को बगावत नहीं हुई थी। जबकि पहले एक रिबेल हुआ था। 34 दिन तक 90 एमएलए होटल में रहे थे। उन्होंने सरकार बचाने में सहयोग किया। उनके बिना सरकार बच नहीं सकती थी। वह हाईकमान के लॉयलिस्ट थे। बिना हाईकमान के कोई मुख्यमंत्री सरकार नहीं बचा सकता है अगर हाईकमान आशीर्वाद देती है तो ही लोग साथ रहते हैं। निजी मित्रों के तौर पर उसके पास 10- 15 विधायक हो सकते हैं।
इस सवाल पर कि विधायकों ने आपके कहने पर बगावत की, मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कहना बिल्कुल बकवास है। मेरी राजनीति और नेचर पूरा हिन्दुस्तान जानता है। पार्टी ने और गांधी फैमिली ने 50 साल से लगातार पदों पर रखा। पांच बार एमपी, तीन बार केंद्रीय मंत्री, तीन बार एआईसीसी का महामंत्री, तीन बार पीसीसी अध्यक्ष और तीन बार सीएम बना हूं। मुझे अब क्या जरूरत है इस बात की। ऐसा एक भी एमएलए कह दे मैं पॉलिटिक्स छोड़ दूं।
सीएम बोले.. सचिन पायलट को सीएम बनाने की बात फैलने पर विधायक नाराज हुए। पायलट ने खुद भी इस प्रकार का व्यवहार किया वह मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। उन्होंने कई जगह टेलीफोन किए कि ऑब्जर्वर आएंगे। आप हाईकमान पर छोड़ देना। इससे विधायकों को लगा कि आज एक लाइन का प्रस्ताव आ रहा है, कल शपथ हो रही है। इस भ्रम में सभी लोग इकट्ठे हो गए।
पायलट को सीएम बनाने में क्या आपत्ति थी, इस सवाल पर गहलोत ने कहा कि ऐसा इतिहास में कभी नहीं हुआ कि पार्टी का अध्यक्ष खुद अपनी सरकार गिराने के लिए विपक्ष से मिल जाए। पायलट उस वक्त पीसीसी अध्यक्ष और डिप्टी सीएम थे। इसी बात से विधायकों को गुस्सा आया। मंत्री के बगावत के उदाहरण तो मिल जाएंगे,लेकिन अध्यक्ष के नहीं। हमें 34 दिन तक होटल में रहना पड़ा। मानेसर में सरकार गिराने की साजिश के लिए मीटिंग हो रही थी। इसमें अमित शाह और धर्मेन्द्र प्रधान भी शामिल थे। इसीलिए विधायक गुस्सा हुए। वह विधायक हाईकमान के लॉयल थे। आज भी हैं। उनमें सोनिया गांधी के प्रति हाईएस्ट रिस्पेक्टेड रिगार्ड है।
इस प्रश्न पर कि शायद हाइकमान ही शायद पायलट के समर्थन में विधायकों को समर्थन चाहता था... गहलोत बोले कि पायलट को सीएम नहीं बना सकते। जिस आदमी के पास दस विधायक नहीं, जिसने बगावत की। जिसको गद्दार ही नाम दिया गया है...पार्टी से गद्दारी किए हुए व्यक्ति को कैसे स्वीकार किया जा सकता है। विधायक कैसे सहन कर सकते हैं पायलट को। हम जानते हैं कि 34 दिन कैसे निकाले। हमे राजभवन पर धरना देना पड़ा। उस वक्त हमने सरकार बचाने का काम किया।
सचिन के भाजपा से संपर्क नहीं होने संबंधी बयान पर सीएम ने कहा कि पायलट इस बात से इनकार नहीं कर सकते। पूरा खेल ही उनका था। मेरे पास इसका सबूत है कि 10—10 करोड़ रुपए बांटे गए। यह पता नहीं कि किसको पांच मिले, किसको दस। दिल्ली में बीजेपी के दफ्तर से ये पैसे उठाए गए थे। 50 साल के इतिहास में लोग एआईसीसी जा कर बैठे हैं। मैडम से शिकायत की। लेकिन यह पहला केस था कि मानेसर में जाकर बैठ गए। धर्मेंद्र प्रधान खुद मानेसर आते थे। हमारे दो निर्दलीय विधायक भी थे, जिन्हें अलग होटल में रोका गया।
Published on:
25 Nov 2022 10:26 am
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