20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

 रोजड़ों पर अफीम का नशा

कांठल में अफीम की फसल में रोजड़ों से काफी नुकसान हो रहा है। इन दिनों फूल से डोडे बनने की अवस्था चल रही है। ऐेसे में रोजड़े डोडों को खाकर नशेड़ी हो रहे हैं। यूं कहा जाए कि रोजड़ों पर अफीम का नशा सिर चढ़कर बोल रहा है। 

2 min read
Google source verification

image

Moti ram

Feb 03, 2015

कांठल में अफीम की फसल में रोजड़ों से काफी नुकसान हो रहा है। इन दिनों फूल से डोडे बनने की अवस्था चल रही है। ऐेसे में रोजड़े डोडों को खाकर नशेड़ी हो रहे हैं। यूं कहा जाए कि रोजड़ों पर अफीम का नशा सिर चढ़कर बोल रहा है।

ऐसे में अफीम कृषकों के सामने रोजड़ों से फसल की सुरक्षा करना भारी मुसीबत बनती जा रही है। जिले में पिछले कुछ वर्षों से रोजड़ों की संख्या बढऩे के साथ ही फसलों की रखवाली करना किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे में रिस्क वाली और सबसे महंगी फसल अफीम की सुरक्षा तो किसानों को कैसे भी करनी ही है।

अफीम की फसल में सबसे अधिक नुकसान की आशंका प्रकृति प्रकोप से होती है। अब इससे भी अधिक नुकसान रोजड़ों से होने लगा हैं। अफीम की फसल में डोड़े बनने के बाद तो इनकी सुरक्षा अधिक करनी पड़ रही है। रोजड़े अब नशेड़ी बनते जा रहे हैं।

जिस खेत में रोजड़े घुस जाते हैं, उस खेत में अफीम की फसल चट करने के बाद रोजड़े खेत में लोटने लग जाते हैं। इससे फसल भी नष्ट हो जाती है। संचई के अफीम कृषक सत्यदेवसिंह ने बताया कि पिछले दो वर्षों से उनके खेत में रोजड़े आने लगे थे।

जो डोड़ों को खाकर वही लोटने लगते थे। इसके लिए उन्होंने इस वर्ष तारबंदी भी की है। डोड़े बनने के बाद सुरक्षा के लिए रात को खेत पर ही रखवाली करनी पड़ रही है। किसानों ने बताया कि कई बार तो रोजड़े इन तारों को कूदकर खेतों में आ जाते हैं।

ये है अफीम बुवाई का आंकड़ा
तहसील---रकबा---गांव---कृषक
अरनोद---८७.९५---३५---६०९
प्रतापगढ़---३४९.२५---१०७---२३१५
छोटीसादड़ी---५०२.९५---७४---२९५५
योग---९४०.१५---२१६---५८७९
(आंकड़े नारकोटिक्स विभाग के अनुसार, रकबा हैक्टेयर)

चौपायों में भी नशे का असर
कोई भी नशीली वस्तु का सेवन अगर पशु या अन्य जीव करता है तो उसका असर होता है। रोजड़े भी अगर अफीम के डोडे खाते हैं तो उनमें भी नशा होगा। इस जिले में भी रोजड़ों के नशेड़ी होने की सूचनाएं मिली है। वैसे फसलों को रोजड़ों से बचाने के लिए कृषक जतन कर रहे हैं। अभी इस समय में अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
डॉ. राकेश कुमार यादव, संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग, प्रतापगढ़

दुबारा घुस जाते खेतों में
छोटीसादड़ी। क्षेत्र में अफीम उत्पादक किसान इन दिनों फसल की रखवाली के लिए खेतों में ही रतजगा कर रहे हैं। रोजड़ों से फसल रखवाली के लिए किसानों को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। अभी फसल पर डोडे बन गए हैं।

दूसरी ओर किसानों ने अब खेतों पर ही डेरे डाल दिए हैं। दूसरी ओर क्षेत्र के जलोदा जागीर, बंबोरी, रघुनाथपुरा, दुधी तलाई, प्रतापपुरा, राजपुरा, बसेड़ा, चान्दोली, करजू, साटोला, सेमरथली, गागरोल, कारुंडा, हड़मतिया कुण्डाल, गोठड़ा, सेमरड़ा, नाराणी, बागदरी, केसुन्दा, जलोदिया केलुखेड़ा, बरखेड़ा, स्वरूपगंज, गोमाना, चरलिया, भाटखेड़ा सहित अधिकांश गांवों में रोजड़े फसलों में नुकसान कर रहे हैं।

कोई फसल के चारों ओर रंग-बिरंगे कपड़े की बाउंड्री बना रहे हैं तो कोई पन्नियां लगा रहे हैं। कई किसान तो रात में पटाखे भी छोड़ रहे हैं। कई खेतों में तो रोजड़े के झुण्ड के रूप में खेतों में घुस जाते है और अफीम की फसल चट कर मदमस्त हो जाते हैं। फसल रौंदकर चले जाते है।

होने लगे रोग
छोटीसादड़ी। मौसम में उतार-चढ़ाव के दौर चलने से अफीम की फसल को रोग से बचाने के लिए कीटनाशक का छिड़काव किया जा रहा है। प्रतापपुरा के बद्रीलाल धाकड़, लक्ष्मीलाल धाकड़, अनिल धाकड़, दिनेश धाकड़, धनश्याम धाकड़ आदि ने बताया कि इस फसल में काली मस्सी, सफेद मस्सी, खांखरिया रोग, तना सडऩ आदि रोग दिखाई दे रहे हैं।