
जयपुर . हाल ही में राजस्थान सरकार द्वारा डॉक्टर्स की रिटायरमेंट आयु 62 से बढ़ाकर 65 साल कर दी गई थी जिसका डॉक्टर्स ने जमकर विरोध भी किया था। ऐसे में रिटायरमेंट की आयु बढाए जाने के बाद मरीजों पर आफत आ गई है। क्योकि सबसे बड़े एसएमएस मेडिकल कॉलेज में वरिष्ठ हों या कनिष्ठ डॉक्टर, सभी इलाज करने के बजाए प्रशासनिक पद पर नजर गढ़ाए हुए बैठे हैं। 62 साल पार कर चुके वरिष्ठतम डॉक्टर चाहते हैं कि वे पहले वाले पदों पर ही बने रहें। इनसे कुछ जूनियर और सीनियर ही माने जाने वाले 62 की उम्र के आसपास वाले डॉक्टर चाहते हैं कि वे अब इन पदों पर आ जाए। इतना ही नहीं स्वयं कॉलेज के प्राचार्य भी इस मामले में कोर्ट तक जा चुके हैं।
आवेदन मांगते ही लग गई है होड़
जयपुर-अजमेर के मेडिकल कॉलेज में प्राचार्य एवं नियंत्रक पद के लिए 11 मई तक आवेदन मांगे गए हैं। आवेदन मांगते ही वरिष्ठ डॉक्टर भी आमने-सामने हो गए हैं। वर्तमान में तैनात चिकित्सक भी होड़ में हैं। कुछ तो पद के लिए सरकार और सरकार के नजदीकी प्रभावशाली संगठन तक की डिजायर भी लगवा चुके हैं। इस पर चिकित्सकों ने आपत्ति भी जताई है, इनका कहना है कि यह पद पूरी तरह मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के मापदंडों को पूरी करने वाला व शैक्षणिक योग्तया व प्रशासनिक दक्षता वाला पद है।
एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.यू.एस.अग्रवाल, ने कहा की चिकित्सक ही इन पदों पर नियुक्त होते आए हैं। सवाल यह है इन पदों के लिए होड़ के बजाय चयन का मापदंड योग्यता होनी चाहिए।
अस्पताल, 50 से भी ज्यादा बड़े पद
मेडिकल कॉलेज से एसएमएस सहित जेेके लोन, जनाना, महिला, श्वांस रोग संस्थान, मनोरोग, गणगौरी, कांवटिया, सेठी कॉलोनी अस्पताल संबद्ध हैं। हर अस्पताल में विभागाध्यक्ष, अधीक्षक, अतिरिक्त अधीक्षक, उप अधीक्षक, प्राचार्य एवं नियंत्रक, एमओआईसी, अतिरिक्त प्राचार्य जैसे करीब 50 बड़े पद हैं।
Published on:
10 May 2018 11:50 am
