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सात साल बाद आरटीओ ने निकाला बकाया, हाईकोर्ट में प्रमुख सचिव ने दी सफाई

जिस पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता को मामले के निस्तारण के लिए धौलपुर आरटीओ के समक्ष तीस नवंबर को पेश होने के निर्देश दिए। इसके बाद मामले को 5 दिसंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के आदेश दिए।
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कल आपसी सहमति से निपटेंगे लाखों मुकदमें

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जयपुर। रजिस्ट्रेशन से पहले एनओसी जारी करने के सात साल बाद पुराना बकाया निकालने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की। कोर्ट में व्यक्तिगत तौर पर पेश हुए प्रमुख परिवहन सचिव आनंद कुमार ने ऑनलाइन व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि विभाग इस मामले में पुन: परीक्षण करेगा। जिस पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता को मामले के निस्तारण के लिए धौलपुर आरटीओ के समक्ष तीस नवंबर को पेश होने के निर्देश दिए। इसके बाद मामले को 5 दिसंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के आदेश दिए।

अधिवक्ता सतीश खंडेलवाल ने बताया कि अपीलार्थी सियाराम ने जोधपुर से एक ट्रक वर्ष 2014 में खरीदा था। इसे लेकर जोधपुर आरटीओ ने एनओसी भी जारी कर दी थी। उसने वाहन को अपने नाम करवाकर धौलपुर आरटीओ में पंजीकृत करा लिया। वर्ष 2021 में जब वह फिटनेस कराने पहुंचा तो विभाग ने बताया कि उसके वर्ष 2010 और वर्ष 2012 के ओवरलोडिंग के दो लाख रुपए के चालान राशि बकाया है। अपीलार्थी ने कहा कि आरटीओ वाहन के बकाया को लेकर एनओसी जारी कर चुका है और सात साल तक विभाग ने कोई कार्रवाई भी नहीं की। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने प्रमुख परिवहन सचिव को पेश होकर जवाब देने को कहा था। न्यायाधीश पंकज भंडारी और न्यायाधीश समीर जैन की खंडपीठ ने प्रमुख परिवहन सचिव आनंद कुमार से पूछा कि जब एक बार एनओसी जारी हो चुकी है तो आरटीओ पुराने चालान के आधार पर सात साल बाद वसूली कैसे निकाल सकता है। जिसपर अधिकारी ने कहा कि ऑनलाइन व्यवस्था शुरू होने के कारण ऐसा हुआ है। इसलिए अब याचिकाकर्ता को जारी चालान पर पुन: विचार करेंगे।