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खौफ के साये में 

नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप ने डूंगरपुर तक नेपाली परिजनों को चिंतित कर दिया। भूकंप की सूचना मिलते ही यहां के नेपाली मूल के बाशिंदों के चेहरे मुरझा गए।  मूलत: नेपाल निवासी गणेश सिंह को अपने भतीजे को खोने की जानकारी मिली तो वे गमजदा हो उठे।

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Moti ram

Apr 28, 2015

नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप ने डूंगरपुर तक नेपाली परिजनों को चिंतित कर दिया। भूकंप की सूचना मिलते ही यहां के नेपाली मूल के बाशिंदों के चेहरे मुरझा गए। मूलत: नेपाल निवासी गणेश सिंह को अपने भतीजे को खोने की जानकारी मिली तो वे गमजदा हो उठे।

डूंगरपुर में करीब 30 साल से रहने वाले श्रीनाथ मंदिर का चौकीदार गणेश व कांस्टेबल थापा सहित अन्य नेपाली मूल के लोगों ने बताया कि अभी भी टीवी पर भूकंप के समाचार प्रसारित होते ही उनके दिल की धड़कन तेज हो जाती है। किसी अनहोनी की आशंका से वे मायूस हो जाते हैं।

नेपाल के अछाम जिले के जनालीकोट निवासी गणेश पुत्र नंद सिंह भांट ने बताया कि नेपाल अरब बैंक में मैनेजर उसका भाई पूरन सिंह अपने 15 वर्षीय पुत्र संपूर्ण सिंह के साथ काठमांडू में 25 अप्रेल को दोपहर 12 बजे एक होटल के उद्घाटन समारोह में शामिल होने जा रहा था।

भूकंप के मलबे में दब जाने से संपूर्ण की मौत हो गई, जबकि पूरन का हाथ फ्रैक्चर हो गया। 25 अप्रैल को ही रात 11 बजे अंतिम संस्कार कर दिया गया और गणेश को भी उसी समय इसकी सूचना मिली। गणेश को अब काठमांडू में रहने वाली 18 वर्षीया बिटिया रूपा कुमारी की चिंता हर पल सता रही है।

छा गई मायूसी
पुलिस लाइन के सरकारी निवास में 4 पुत्रों सहित परिवार के साथ निवासरत नेपाल के पीयूठान निवासी धर्मसिंह थापा का कहना है कि उसके परिजन व मित्र सकुशल हैं। लेकिन एक अज्ञात भय के साये में परिवार के साथ वह यहां रह रहा है। हमेशा परिवार के सदस्यों की निगाहें टीवी पर टिकी रहती है।