
Amalaki Ekadashi Puja vidhi -
जयपुर.
6 मार्च को आंवला एकादशी है, यह अहम एकादशी शुक्रवार के दिन पड़ रही है. इसे आमलकी, अमला या रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है। आंवला का धार्मिक और चिकित्सकीय महत्व है, आयुर्वेद में इसे श्रेष्ठ फल बताया गया है। इसके औषधीय गुणों को अब आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी स्वीकार कर चुका है। यही कारण है कि आंवला एकादशी पर आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है।
इधर इस एकादशी का ज्योतिषीय महत्व भी है. पंडित दीपक दीक्षित बताते हैं कि वैवाहिक दिक्कतें दूर करने के लिए पद्म पुराण में आंवला और भगवान विष्णु के संबंध का उल्लेख किया गया है. इसके अनुसार आंवले के वृक्ष में विष्णुजी एवं लक्ष्मी जी का वास होता है। कुछ धार्मिक ग्रंथों के अनुसार श्रीविष्णु के मुख से ही आंवला का पेड उत्पन्न हुआ है इसलिए इसका वृक्ष भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय होता है। आमलकी एकादशी पर आंवले के वृक्ष के नीचे भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है। आंवला में भगवान विष्णु का वास होने की वजह से इस दिन पूजा के साथ ही आंवला दान भी किया जाता है। वैवाहिक दिक्कतें दूर करने के लिए इस दिन भगवान विष्णु की पूजा श्रेष्ठ फलदायी मानी जाती है।
आंवला एकादशी व्रत की पूजा विधि
पंडित दीपक दीक्षित के अनुसार इस दिन आंवले का उबटन शरीर पर लगाकर आंवले के जल से ही स्नान करें। स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान विष्णु की पूजा करें और शुदृध घी का दीपक जलाकर विष्णुसहस्रनाम स्तोत्र का पाठ करें। इसके बाद आंवले के वृक्ष की धूप, दीप, आदि से पूजन करें, किसी गरीब, जरुरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को भोजन कराएं। आंवला पूजन के बाद आंवले का भोजन और आंवले का दान भी करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार आमलकी एकादशी के दिन आंवले का सेवन करना बहुत लाभकारी होता है।
Published on:
06 Mar 2020 10:16 am
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