
Ambedkar Jayanti 2018
जयपुर ।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 127 वीं जयंती (Ambedkar Jayanti 2018) पर प्रदेश में जगह-जगह कार्यक्रमों का आयोजन होगा। इन कार्यक्रमों को शांति पूर्वक बनाए रखने के लिए जिले के कलेक्टर सिद्धार्थ महाजन ने अधिकारियों से बैठक ली। संविधान के निर्माता बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर अपने जन्म के 127 सालों बाद आज भी प्रासंगिक हैं। लेकिन असल में अंबेडकर भीमराव नहीं थे। आइए आज हम आपको बाबा साहेब अम्बेडकर के बारे में यह रोचक जानकारी देते है।
अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को इंदौर के पास महू शहर में हुआ था। ये एक महार परिवार में जन्में थे। बाबा साहेब की माता भीमा बाई और पिता रामजी मालोजी शकपाल थे। अंबेडकर का बचपन बहुत ही मुश्किलों में बीता था। इसका कारण था की महार जाति को अछूत माना जाता था। अंबेडकर के पिता रामजी सेना में सूबेदार थे। अंबेडकर का नाम भीमराव अंबेडकर माता-पिता और गांव के नाम पर पड़ा। जैसा कि उनकी माता का नाम भीमा बाई और पिता के नाम पर उनका नाम भीमराव और गांव का नाम आम्बेडकर था, ऐसे बाबा साहेब का नाम भीम राव अंबेवाडेकर पड़ा।
छुआछूत की मानसिकता के चलते कक्षा से बहार भी पढ़ना पड़ा
भीमराव बचपन से ही पढ़ने में तेज़, कुशल बुद्धि वाले प्रतिभावान थे। लेकिन पहले के समाज की सोच और छुआछूत होने की वजह से उनको कठनाइयों का सामना करना पड़ता था। कभी-कभी इस मानसिकता के चलते भीमराव को कक्षा के बाहर पढ़ना पड़ता था। लेकिन प्रतिभावान होने के साथ उनमें हर चीज़ की ललक थी वे कभी चुनौतियों के नहीं हारे और न ही झुके।
अंबेडकर के 13 बहन-भाई और थे, वे सभी अम्बेडकर से बड़े थे। भीमराव अपने माता-पिता की चौदहवीं संतान थे। भीमराव जब छोटे थे तब ही इनके पिता की मृत्यु हो गई थी। पिता की मौत से परिवार में ग़रीबी छा गई और परिवार के सामने बहुत बड़ी कठिनाई खड़ी हो गई। अंबेडकर को पढ़ाई का शुरू से शौक़ था। भीमराव ने वर्ष 1907 में मैट्रिक परीक्षा पास कर ली थी और वर्ष 1906 में भीमराव की रमाबाई से बालविवाह हो गया था। भीमराव इस समय महज़ 15 वर्ष के ही थे और रमाबाई 9 साल की। लेकिन भीमराव का पढ़ाई के प्रति मोह उतना ही रहा और उन्होंने वर्ष 1912 में बॉम्बे विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र विषय में पढ़ाई कर के डिग्री हासिल की।
ऐसे बदला गया नाम, अंबेवाडेकर से हुआ अंबेडकर
डॉ. भीमराव अम्बेडकर पर लिखी पुस्तक "प्रखर राष्ट्रभक्त डॉ. भीमराव अंबेडकर"में जानकारी दी हैं की “भीमराव की पढ़ाई की लगन को देखकर उनके हाईस्कूल के वक़्त एक ब्राह्मण अध्यापक जिनका नाम महादेव अंबेडकर था। उनका भीमराव से विशेष लगाव था और उन्होंने ही भीमराव का उपनाम अंबेवाडेकर से बदलकर स्वयं के उपनाम पर अंबेडकर रख दिया था और उसी दिन से भीमराव ने उपनाम के आगे अंबेडकर पड़ा जो आज तक भीमराव अंबेडकर नाम लिया जाता है।
Updated on:
14 Apr 2018 09:57 am
Published on:
14 Apr 2018 07:00 am
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