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Save Aravalli : 10,00,0 सक्रिय खानों से रोज हो रहा अरावली छलनी, संरक्षण के बजाय राजस्व को प्राथमिकता दे रहीं हैं सरकारें

Save Aravalli : राजस्थान में करीब 50 हजार वर्ग किमी में फैली अरावली पर्वतमाला लगभग 10 हजार सक्रिय खानों से छलनी हो रही है। आखिर अरावली में कब रुकेगा खनन।

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जयपुर

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Sanjay Kumar Srivastava

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सुनील सिंह सिसोदिया

Dec 26, 2025

Save Aravalli : राजस्थान में करीब 50 हजार वर्ग किमी में फैली अरावली पर्वतमाला लगभग 10 हजार सक्रिय खानों से छलनी हो रही है। अरावली में खनन को लेकर करीब 30 वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है, लेकिन कई अदालती हस्तक्षेपों के बावजूद जमीनी स्तर पर गतिविधियां नहीं रुकीं। राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और गुजरात में फैली अरावली पर सियासत गरमा रही, पर संरक्षण के ठोस प्रयास नहीं हुए। राजस्थान में अरावली क्षेत्र 1.13 लाख वर्ग किलोमीटर है, जिसमें 50 हजार वर्ग किलोमीटर पहाड़ी हिस्सा शामिल है। बावजूद इसके, सरकारों ने संरक्षण के बजाय राजस्व को प्राथमिकता दी है।

राज्य में अरावली का दायरा

विभागीय सूत्रों के अनुसार प्रदेश के 20 जिलों में अरावली पहाड़ियों का क्षेत्र 50 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक है। इसमें से 8 से 10 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली अरावली पहाड़ियों का है। वास्तविक क्षेत्रफल का आकलन केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से एमपीएसएम तैयार होने के बाद ही सामने आएगा।

सुप्रीम कोर्ट में प्रमुख घटनाक्रम

अरावली हिल्स को लेकर करीब 30 साल (1995) से मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।
30 अक्टूबर, 2002 : पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के आलमपुर और कोटे गांव में अवैध खनन पर रोक लगाई।
9 दिसंबर, 2002 : राजस्थान में अरावली हिल्स क्षेत्र की सभी खानों को बंद किया गया।
16 दिसंबर, 2002 : राज्य सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने संशोधित आदेश जारी किया। इसमें आवंटित खानों को चालू रखने और अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
8 अप्रेल, 2005 : राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में 100 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों को अरावली हिल्स मानते हुए वहां खान आवंटन बंद करने का शपथ-पत्र पेश किया।
20 नवंबर, 2025 : अरावली हिल्स मामले में सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला।

रोक नहीं लगती तो हालात और बिगड़ते

अरावली का मामला लंबे समय से कोर्ट में लंबित होने के चलते पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से नई खानों के आवंटन पर रोक है। जो खानें चल रही हैं, वे दशकों पहले आवंटित की गई थीं। यदि नई खानों पर रोक नहीं लगाई जाती, तो अरावली का बड़ा हिस्सा अब तक पूरी तरह नष्ट हो चुका होता।

सभी खानों का गणित

11,000 से अधिक खानें 20 जिलों में आवंटित।
10,000 खानें (100 मीटर से कम ऊंचाई पर)।
1,008 खानें (100 मीटर से अधिक ऊंचाई पर)।
747 खानें संचालित (100 मीटर से अधिक ऊंचाई पर)।
261 खानें नवीनीकरण में (100 मीटर से अधिक ऊंचाई पर)।
9,500 के आसपास खानें संचालित (100 मीटर से नीचे)।
10,000 खानें करीब 900 वर्ग किमी क्षेत्र में वर्तमान में संचालित।
(सभी आंकड़े अनुमानित)

3 हजार नई खानें संचालन के इंतजार में

खान विभाग के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में अरावली क्षेत्र में 3 हजार से अधिक नई खानें आवंटित की गई हैं, लेकिन न्यायालय की रोक के कारण इनका संचालन नहीं हो सका। हालिया न्यायालय के फैसले के बाद इनके संचालन का मार्ग खुला है, हालांकि ये खानें भी केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा एमपीएसएम तैयार होने के बाद ही शुरू होंगी।