5 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

catch_icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Education: काउंसलिंग में मनमानी… खास को आस-पास, आम को दूर के स्कूल में पोस्टिंग

शिक्षक संगठनों का आरोप है कि विभाग चांदी कूटने के लिए प्राइम लॉकेशन के स्कूलों की सूची को पोर्टल पर दिखाते ही नहीं हैं।

2 min read
Google source verification

विजय शर्मा

राजस्थान में शिक्षा विभाग में हाल ही करीब दस हजार पदोन्नतियां पूरी की गई हैं। जयपुर में पदोन्नत शिक्षकों को ऑनलाइन काउंसलिंग के जरिये स्कूल आवंटन किए गए हैं। हजारों ऐसे शिक्षक हैं जिन्हें वर्तमान जिले से 300 से 400 किलोमीटर दूर स्कूलों में भेजा गया है। इतना ही नहीं कई शिक्षकों को दूर गांवों में भेज दिया। इसका शिक्षकों की ओर से विरोध किया जा रहा है।

दरअसल, शिक्षा विभाग में ऑनलाइन काउंसलिंग के दौरान स्कूल दर्शाने का कोई नियम नहीं है। विभाग मनमर्जी या मंत्री के आदेश के तहत ही पोर्टल पर स्कूलों की सूची जारी करता है। इनमें दूर-दराज के स्कूलों को पहले दिखाया जाता है। जबकि शहरी क्षेत्र के स्कूलों में भी पद खाली होते हैं। मनमर्जी के कारण शिक्षकों को मजबूरन दूर-दराज के स्कूलों का चयन करना होता है। साथ ही शिक्षा विभाग में काउंसलिंग का कोई नियम नहीं है। विभाग बार-बार अपने नियम बदल देता है।

आरोप, लाभ पहुंचाने के लिए बढ़ा रहे तिथि

शिक्षा विभाग की ओर से वरिष्ठ अध्यापक से व्यायाता और उप प्रधानाचार्य व व्यायाता से पदोन्नत प्रधानाचार्य कार्यग्रहण तिथि 14 मई तक बढ़ाने पर विवाद शुरू हुआ है। संगठनों का अरोप है कि माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने एक आदेश जारी किया है, जिसमें कार्य ग्रहण 14 मई तय किया है जो आदेश 5 मई को दोपहर 11 बजे बाद किए गए हैं। पूर्व में उक्त पदों पर पदोन्नत अधिकारियों के कार्यग्रहण की अंतिम तिथि 5 मई तय की गई थी। 4 मई को रविवार होने से पदोन्नत अधिकारी 3 मई को ही कार्य मुक्त हो गए थे।

शिक्षा विभाग में सीधी भर्ती और पदोन्नति पर काउंसलिंग के पारदर्शी नियम बनाने चाहिए। हर बार काउंसलिंग अलग नियम से कराई जाती है। काउंसलिंग में शहरी क्षेत्रों सहित संपूर्ण रिक्त पद खोले जाने चाहिए। विभाग में कार्यरत शिक्षक पति-पत्नी को भी काउंसलिंग में वरीयता मिलनी चाहिए।

यह भी पढ़ें: ट्रेनों में ‘नो रूम’ के हालात, स्पेशल ट्रेनों से भी नहीं राहत,कंफर्म सीट की नहीं गारंटी

तबादलों के समय रहती अच्छी जगहों की डिमांड

शिक्षा विभाग में तबादलों की चहल-पहल रहती है। व्यायाता, प्रिंसिपल, सैकंड ग्रेड सहित अन्य शिक्षकों की शहरी क्षेत्र या सड़क किनारे स्कूल में ज्वॉइन करने के लिए डिमांड रहती हैं। ऐसे में डिमांड रहने के कारण शहरी क्षेत्र के स्कूलों को तबादलों के जरिये ही भरा जाता है। शिक्षक संगठनों का आरोप है कि विभाग चांदी कूटने के लिए प्राइम लॉकेशन के स्कूलों की सूची को पोर्टल पर दिखाते ही नहीं हैं।
विपिन प्रकाश शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष, राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ

शिक्षामंत्री बोले, नहीं की जाती मनमानी

काउंसलिंग में कोई मनमानी नहीं की जाती। कोशिश यही रहती है कि जिन स्कूलों में शिक्षकों की ज्यादा जरूरत है, वहां प्राथमिकता से लगाए जाएं। शहरी क्षेत्रों के स्कूलोें को खोल दिया जाएगा तो दूर-दराज कोई नहीं जाएगा। - मदन दिलावर, शिक्षा मंत्री

यह भी पढ़ें: जोधपुर में पाकिस्तान की बुजदिली की निशानी पर चढ़कर मनाया एयरस्ट्राइक का जश्न


बड़ी खबरें

View All

जयपुर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग