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जयपुर में मौजूद है रामायण और गीता के हस्तलिखित ग्रंथ

Rajasthan News : हस्तलिखित ब्रह्मपुराण, वाल्मीकि रामायण व भगवत गीता जैसे दुर्लभ ग्रंथ व पुस्तकें जयपुर में मौजूद हैं। तुलसीदास की 1853 में लिखी 640 पेजों की षोड़श रामायण संग्रह भी हैं।

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जयपुर . संग्रहालय में मौजूद हस्तलिखित श्रीमद्भागवतगीता।

Jaipur News : हस्तलिखित ब्रह्मपुराण, वाल्मीकि रामायण व भगवत गीता जैसे दुर्लभ ग्रंथ व पुस्तकें जयपुर में मौजूद हैं। तुलसीदास की 1853 में लिखी 640 पेजों की षोड़श रामायण संग्रह भी हैं। जल्द ही आप इन्हें घर बैठे ऑनलाइन पढ़ और देख पाएंगे।


अल्बर्ट हॉल स्थित लाइब्रेरी में ये आज भी सुरक्षित हैं। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने मध्यकालीन इतिहास सहित 1950 से पहले की ऐतिहासिक पुस्तकों को ऑनलाइन करने की तैयारी कर ली है। लाइब्रेरी में मौजूद करीब 757 पुस्तकों को ऑनलाइन किया जा रहा है। विभाग की ओर से अल्बर्ट हॉल पुस्तकालय के डिजिटाइजेशन के लिए 15.40 लाख रुपए की स्वीकृति जारी की जा चुकी है। इस काम की प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति भी मिल चुकी है।



पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने अल्बर्ट हॉल पुस्तकालय जयपुर के डिजिटाइजेशन और नवीनीकरण के लिए करीब 36 लाख रुपए की प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति जारी की। इसमें से करीब 20 लाख रुपए खर्च कर पुस्तकालय का रिनोवेशन का काम कर लिया गया है।

- हस्तलिखित हरिवंश पुराण पत्र 414

- 1815 की हस्तलिखित योग प्रदीपिका।

- 1886 में लिखी टी.एच. हेंडले की पुस्तक जैपुर एनामल्स।

- 1886 की हेंडबुक ऑफ द जयपुर कोर्ट्स।

- पूर्व राजा-महाराजाओं व रानियों की ज्वैलरी-आभूषण, हथियार व चित्रकारी की पुस्तकें।


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648 पेजों का हस्तलिखित ’ब्रह्मपुराण’, 2800 पेजों की हस्तलिखित वाल्मीकि रामायण व 1940 पेजों की भगवत गीता के अलावा तुलसीदास की 1853 में लिखी ’षोड़श रामायण संग्रह’, आचार्य विद्यासागर द्वारा 1884 में लिखा 446 पेजों का महानिर्वाण तंत्र, ’अथ नृसिंह चंष प्रारंभ’। 1883 में लंदन की एग्जीबिशन में प्रदर्शित की गई हेंडले की पुस्तक ’मेमोरियल ऑफ द जयपुर’ भी है।