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पिता का राजस्थान में जादू चलता था, बेटे-बेटी बाहर जाकर पस्त, केवल सनी देओल का चला जादू

कई बाहरी नेता राजस्थान आकर वर्षों तक जमे रहे, लेकिन उनके बेटे-बेटी बाहर जाकर खुद पैर ही नहीं जमा पाए हैं।

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Sunny Deol

जयपुर। कई बाहरी नेता राजस्थान आकर वर्षों तक जमे रहे, लेकिन उनके बेटे-बेटी बाहर जाकर खुद पैर ही नहीं जमा पाए हैं। बूटा सिंह, बलराम जाखड़ और बंगारू लक्ष्मण जैसे कई नेता राजस्थान के नहीं थे पर उन्होंने वर्षो तक यहां से चुनाव लड़कर जनता के बीच अपनेपन का अहसास कराया। वैसे अभिनेता धर्मेन्द्र ने भी राजस्थान की बीकानेर लोकसभा सीट से चुनाव जीता था। इन सभी के बेटे-बेटी इस बार चुनाव मैदान में आए और प्रदेश से बाहर जा कर दम दिखाने का प्रयास किया, लेकिन अभिनेता धर्मेन्द्र के बेटे अभिनेता सनी देओल को छोडक़र कोई नहीं चला।

सनी देओल ने तो पंजाब के गुरदासपुर में बलराम जाखड़ के बेटे सुनील जाखड़ को हराया है। बलराम जाखड़ मूलत: पंजाब के फिरोजपुर जिले के रहने वाले थे। इसी तरह बूटा सिंह का पंजाब के जालंधर में जन्म हुआ, लेकिन जालोर से चार बार सांसद रहे। उनके बेटे अरविन्दर सिंह लवली को कांग्रेस ने पूर्वी दिल्ली से लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी बनाया, लेकिन भाजपा प्रत्याशी क्रिकेटर गौतम गंभीर ने उनको हरा दिया है।

इसी तरह भाजपा के टिकट पर बंगारू लक्ष्मण ने जालोर से चुनाव लड़ा, वे आंध्रप्रदेश के रहने वाले थे और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे। 2004 के लोकसभा चुनाव में बंगारू लक्ष्मण की पत्नी सुशीला बंगारू को जालोर में भाजपा का उम्मीदवार बनाया गया। इस चुनाव में सुशीला बंगारू बूटासिंह को हराकर जालोर की पहली महिला सांसद बनीं।

इस लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बंगारू लक्ष्मण की बेटी श्रुति बंगारू उर्फ बंगारू श्रुति को तेलंगाना के नागर कुर्नूल से टिकट दिया, वे तीसरे स्थान पर रही हैं। हुड्डा का मिर्धा परिवार से रिश्ता हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा सोनीपत व उनके बेटे दीपेन्द्र सिंह हुड्डा रोहतक से चुनाव में पिछड़ गए हैं। दीपेन्द्र सिंह हुड्डा की पत्नी नागौर से कद्दावर नेता रहे नाथूराम मिर्धा की पोती और नागौर से कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति मिर्धा की बहन हैं।