
ओलंपिक पदक विजेता मैरी कॉम ने कहा: मैं गरीब परिवार हूं, बहुत संघर्ष किया है, एयू बनो चैंपियन की हुई शुरूआत
जयपुर। राजधानी जयपुर में एयू बनो चैंपियन के तीन दिवसीय टूर्नामेंट की शुरूआत हो गई है। एसएमएस स्टेडियम में बुधवार को कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि, मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़, ओलंपिक पदक विजेता मैरी कॉम और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के संस्थापक संजय अग्रवाल व अन्य उपस्थित रहे।
इस अवसर पर मैरी कॉम ने कहा कि मैं गरीब परिवार से हूं। मैंने बहुत संघर्ष किया है। हमेशा खेल खेला और आगे बढ़ी। कभी नहीं सोचा कि क्या होगा। हमेशा यही सोचा कि जो होगा, देखा जाएगा। खेल से व्यक्तित्व का निर्माण होता है। इसलिए मैं देश से खेलों को जीवनशैली के रूप में अपनाने का आग्रह करती रही हूं। वास्तव में यह सबसे अच्छा है कि हम बच्चों को उनके शुरुआती साल में खेलों से परिचित कराएं। आज जब मैं यहां 1500 से अधिक बच्चों को चैंपियन बनने की राह पर देख रही हूँ तो मुझे लगता है कि यह खेल केन्द्रित भारत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह देखकर खुशी होती है कि एक कॉरपोरेट इस उद्देश्य के लिए आगे आ रहा है और दूर-दराज के स्थानों के बच्चों को खेलों के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। मैं यहां आकर सम्मानित महसूस कर रही हूं और मैं एयू बानो चैंपियन राज्य स्तरीय टूर्नामेंट के दूसरे सीजन के लिए एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को बधाई देती हूं। मैं जल्द ही इनमें से कई बच्चों को नेशनल चैंपियनशिप में देखने की उम्मीद कर रही हूं।
इस अवसर पर मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के 'बनो चैम्पियन' पहल की सराहना की। उन्होंने देशभर के कॉर्पोरेट दुनिया से निवेदन किया कि वे सिर्फ अपने व्यापारों पर ध्यान देने के बजाय खेल को बढ़ावा देकर और खेल को अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों में प्राथमिकता देकर राष्ट्र निर्माण में योगदान करें। उन्होंने कहा कि "हमारा लक्ष्य है कि 2036 में राजस्थान को ओलंपिक में सोने का पदक हासिल करना। इसलिए हमें अब से प्रयास शुरू करने की आवश्यकता है।
इस पहल के बारे में विस्तार से बताते हुए, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के फाउंडर, एमडी और सीईओ, संजय अग्रवाल ने कहा कि इस दूसरे राज्य स्तरीय टूर्नामेंट में जमीनी स्तर से बच्चों की सराहनीय भागीदारी को देखकर मुझे बेहद प्रसन्नता हो रही है। बानो चैंपियन कार्यक्रम की शुरुआत के बाद से, एयू एसएफबी ने इसमें नामांकित किए हुए बच्चों की प्रगति की बारीकी से निगरानी की है, उन्हें बेहतर कोचिंग और मार्गदर्शन प्रदान किया है। अपनी शुरुआत के दो साल में बानो चैंपियन ने 60 से अधिक राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को तैयार किया है, जिनके पास पहले कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं था। हाल ही में, इन बच्चों ने खेलो इंडिया गेम्स, स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजीएफआई) की राष्ट्रीय अंडर-17 फुटबॉल टीम और अन्य राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट में प्रतिष्ठित स्थान हासिल किए हैं।
Updated on:
31 Jan 2024 09:59 pm
Published on:
31 Jan 2024 09:58 pm
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