
Balram Jayanti 2020 , Hal Chhath Puja Vidhi Vrat Katha
जयपुर. भाद्रपद माह की षष्ठी तिथि पर कई प्रमुख बड़े व्रत त्योहार पड़ते हैं। इस दिन बलराम जयंती मनाते हैं. उत्तर भारत में यह दिन हल छठ या हर छठ के रूप में भी मनाया जाता है. यह पर्व हलषष्ठी, चंदन छठ, तिनछठी, तिन्नी छठ, ललही छठ, कमर छठ या खमर छठ के नामों से भी जाना जाता है। इस साल हल छठ और बलराम जयंती 9 अगस्त को मनाई जा रही है।
ज्योतिषाचार्य पंडित दीपक दीक्षित बताते हैं कि हल छठ या हल षष्ठी के दिन महिलाएं संतान के सुख की कामना के लिए व्रत रखती हैं। हल छठ का दिन बलरामजी का जन्म हुआ था और हल उनको प्रिय था. इस कारण इस दिन हल जोतकर उगाई हुई चीजों का सेवन नहीं किया जाता है। हलषष्ठी का व्रत खासतौर पर पुत्र के सौभाग्य, स्वास्थ्य और सुख के लिए किया जाता है।
इस दिन दीवार पर छठी माता की आकृति बनाकर उनकी पूजा की जाती है। ज्योतिषाचार्य पंडित दिनेश शर्मा के अनुसार व्रत करने वाली महिलाएं सुबह महुआ के दातुन से दांत साफ करती हैं। इस व्रत में महिलाएं भैंस का दूध ,घी व दही का इस्तेमाल करती हैं, क्योंकि गाय का दूध और दही का उपयोग नहीं किया जाता है। विशेष रूप से हल की पूजा की जाती है।
Published on:
09 Aug 2020 10:24 am
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