
- मूसलाधार बारिश से 'टापू' बना बेणेश्वर धाम
- बांसवाड़ा-डूंगरपुर सीमा पर स्थित है बेणेश्वर धाम
- माहि-सोम-जाखम नदियों का संगम स्थल है ये धाम
- 'ड्रोन' कैमरे में कैद हुआ बेणेश्वर धाम का विहंगम दृश्य
- कभी नहीं देखीं होंगी ऐसे अद्भुद तस्वीरें
- चारों तरफ पानी ही पानी से घिर गया है धाम
- बेणेश्वर पहुंचने वाले सभी रास्ते हुए जलमग्न
तस्वीरों में दिखाई दे रहा ये नज़ारा है बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों की सीमा पर स्थित बेणेश्वर धाम का... सोम और माही नदियों से घिरे बेणेश्वर धाम से कुछ ही दूरी पर जाखम नदी भी माही में समाहित हो जाती है... यह दृश्य राजस्थान के संगम का है... माही, सोम और जाखम नदियों का संगम... ड्रोन कैमरे की मदद से ऋतेश पंचाल, पत्रिका के फोटो जर्नलिस्ट दिनेश तंबोली और पत्रिका संवाददाता विनोद नायक ने यह दृश्य कैद किया...
यह पहली बार है कि बेणेश्वर धाम की ये तस्वीरें 'पत्रिका' डिजिटल पर दिखा रहे हैं... यह दृश्य कैमरे में कैद करने के लिए हमारी टीम को खासी मशक्कत करनी पड़ी... लेकिन हम आखिर कामयाब रहे और आप तक ला सके बेणेश्वर और राजस्थान के त्रिवेणी संगम की जीवंत तस्वीरें... इसके पीछे हमारा मकसद उस परेशानी को भी उजागर करना था जो हर बारिश के बाद यहां आने वाले लोगों को परेशानी में डालती है...
बारिश के कारण टाबू बने बेणेश्वर धाम के रास्ते नदियों में पानी आते ही बंद हो जाते हैं... बेणेश्वर धाम आने वाले श्रद्धालु, क्षेत्र के दुकानदार और मजदूर टापू पर फंस जाते हैं... हालांकि 24 से 48 घंटे में पानी उतर जाने के बाद हालात सामान्य हो जाते हैं...
ये दृश्य प्राकृतिक सौंदर्य तो दर्शा ही रहे हैं, लेकिन बार-बार टापू बन जाने वाले बेणेश्वर धाम की आवाज भी इन दृश्यों में छिपी है कि काश सोम नदी पर बने साबला-बेणेश्वर पुल, धाम को डूंगरपुर से जोड़ने वाले वालाई पुल और माही पर बने बांसवाड़ा को जोड़ने वाले गनोड़ा पुल की ऊंचाई बढ़ जाए तो लोगों को टापू पर फंसना न पड़े...

Published on:
24 Aug 2018 01:34 pm
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