
जयपुर। कोयले की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से राज्य में बिजली की कमी के कारण कभी भी ब्लैक आउट की स्थिति आ सकती है। कोयले की कमी से प्रदेश में 2 प्रमुख पावर प्लांट की 5 इकाइयां बंद हो चुकी हैं। इस कारण प्रदेश में जयपुर सहित सभी जिलों में अघोषित बिजली कटौती की जा रही है। जानकारी के अनुसार, प्रदेश में बिजली का उत्पादन करने वाले 2 प्रमुख पावर स्टेशन कोटा और सूरतगढ़ थर्मल पावर में एक दिन की बिजली बनाने जितना भी कोयला नहीं हैं। छत्तीसगढ़ व अन्य क्षेत्रों से कोयले की सप्लाई पर्याप्त नहीं मिलने के कारण कोयले की कमी बताई जा रही है। ऐसे में पहली बार इन दोनों प्रमुख पावर स्टेशन में कोयला समाप्त हुआ है और ये प्लांट कभी भी पूरी तरह बंद किए जा सकते हैं।
यह हो रहा नुकसान
- 6 .52 करोड़ यूनिट बिजली कम मिल रही है राज्य सेक्टर की सरकारी व निजी क्षेत्र की 13 बिजली उत्पादन इकाइयां बंद होने से
- 3037 मेगावाट है इन इकाइयों की इंस्टाल केपेसिटी
- 831 मेगावाट क्षमता की 4 यूनिट बंद हैं केंद्रीय सेक्टर के औरेया और झज्जर पावर प्लांट की भी
- 13 लाख यूनिट बिजली मिल रही थी इन इकाइयों से राज्य को
पावर कट से बचाव...
रखरखाव के नाम पर बिजली वितरण कंपनियां अभी लगभग पूरे प्रदेश में अघोषित कटौती कर रही हैं। इस कारण सरकारी आंकड़ों में फिलहाल प्रदेश में बिजली की उपलब्धता और खपत में कुछ लाख यूनिट का ही अंतर बताया जा रहा है। राजस्थान विद्युत प्रसारण निगम की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 14 सितंबर को 19.67 करोड़ यूनिट बिजली उपलब्ध थी जबकि खपत 19.75 करोड़ यूनिट बताई गई है। वहीं 15 सितंबर को यह उपलब्धता करीब 1.61 करोड़ यूनिट घटकर 18.06 करोड़ यूनिट ही रह गई है।
कहां कितना कोयला बचा...
कोटा थर्मल : 0.5 दिन
सूरतगढ़ थर्मल : 00 दिन
काली सिंध थर्मल : 04 दिन
छबड़ा थर्मल : 8.5 दिन
यह है स्थिति
प्रदेश में कोटा, सूरतगढ़, छबड़ा और काली सिंध थर्मल पावर प्लांट में कोयले से बिजली बनाई जा रही है। वर्तमान में कोटा थर्मल की 2 और सूरतगढ़ की 3 इकाइयां बंद हैं। इनके अलावा छबड़ा, काली सिंध, रामगढ़ और गिरल की एक-एक इकाई बंद है। निजी क्षेत्र में राजवेस्ट की दो, अडानी और बरसिंगसर की भी एक-एक इकाई बंद है।
(आंकड़े विद्युत प्रसारण निगम की रिपोर्ट के अनुसार)
Updated on:
16 Sept 2017 02:58 pm
Published on:
16 Sept 2017 11:49 am
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