एक इवेंट के सिलसिले में जयपुर आए अभिनेता बोमन ईरानी, अपनी जिंदगी के सफर के विभिन्न पडावों से कराया वाकिफ
जयपुर. अभिनेता बोमन ईरानी ने 41 साल की उम्र में बॉलीवुड में अपना कॅरियर शुरू किया था। इससे पहले वह कई फील्ड में अपने हाथ आजमा चुके थे। एंटरप्रेन्योर्स ऑर्गनाइजेशन के ओर से आयोजित कार्यक्रम में बोमन ने अपनी जिंदगी के कई पन्नों को पलटा और जीवन में आए उतार—चढ़ावों से लोगों को वाकिफ करवाया। बोमन मानते हैं कि उनकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत पहलू यह है कि यह कभी भी एक्स्ट्राऑर्डिनरी नहीं रही। बकौल बोमन, मेरी कहानी एक ऐसे बच्चे की है, जिसके पास स्वयं का एक सपना था। उन्होंने बताया, उनके जन्म से पहले ही पिता की मृत्यु हो गई थी। बचपन में वो ना सिर्फ हमेशा डरे रहते थे बल्कि उन्हें बोलने और समझने में भी परेशानी होती थी। बचपन में हर कोई उन्हें 'बेचारा बोमन' कहकर बुलाता था।
दादी ने कहा, सबसे अच्छे वेटर बनना
बोमन ने कहा कि जहां ज्यादातर बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर या वकील बनना चाहते थे, वहीं मेरी इच्छा वेटर बनने की थी। जब मैंने अपनी इच्छा घरवालों को बताई तो दादी ने कहा, 'कोई बात नहीं तुम वेटर बनो, लेकिन सबसे अच्छे वेटर बनना।' बकौल बोमन, मुझे सबसे पहले ताज होटल के रूम सर्विस डिपार्टमेंट में जॉब मिली और पहली कमाई पांच रुपए की टिप थी। मैंने मुम्बई में आलू वेफर्स की दुकान पर भी काम किया।
स्कूलों के स्पोर्ट्स इवेंट में की फोटोग्राफी
बोमन ने कहा कि शादी के सात साल बाद तक मैं अपनी फैमिली को कहीं घुमाने नहीं ले जा पाया, क्योंकि मेरे पास सेविंग्स नहीं थी। होटल की अपनी कमाई से कुछ बचत की और कैमरा खरीद कर स्पोर्ट्स फोटोग्राफी शुरू की। शुरुआत में स्कूलों के स्पोर्ट्स इवेंट कवर किए और 25 रुपए प्रति फोटो के हिसाब से फोटो बेचे। बाद में उन्हें बॉक्सिंग विश्व कप का ऑफिशियल फोटोग्राफर बनने का अवसर मिला। मेरे फोटोज एक इंटरनेशनल मैगजीन में भी छपे, जिसके लिए 300 डॉलर प्रति फोटो का पेमेंट मिला। इस तरह की जिंदगी में अनेक उतार—चढ़ाव आते रहे। एक समय ऐसा भी था, जब मेरे पास स्कूटर में पेट्रोल डलवाने के भी पैसे नहीं थे और यहां तक कि पत्नी ने अपनी शादी की ज्वैलरी तक बेचने को कह दिया था।
विवेक के लिए लिखी गई थी 'मुन्ना भाई एमबीबीएस'
ईरानी ने बताया कि श्यामक डावर ने मेरे एक्टिंग टैलेंट को पहचान अलीक पदमसी से मिलवाया। यहां से थिएटर का सफर शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि फिल्म 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' विवेक ओबेरॉय को देखकर लिखी गई थी, लेकिन विवेक ने इसके बजाय 'कंपनी' मूवी में काम करना पसंद किया।
बच्चा यदि एग्जाम में अच्छे नम्बर नहीं लाता है तो उस पर कभी कोई प्रेशर ना डालें। किसी की सफलता का आकलन उसकी पढ़ाई से नहीं, बल्कि उसके आर्टिस्टिक टैलेंट से होनी चाहिए।
—बोमन ईरानी