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Jaipur: ‘स्वच्छता का संस्कार’ अभियान को मिला सर्वधर्म धर्मगुरुओं का साथ, स्वच्छता रैंकिंग में खुद की पीठ थपथपा रहे दोनों निगम

गुलाबी नगर की सफाई अब सिर्फ नाम की रह गई है। देश के 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की स्वच्छता रैंकिंग में जयपुर के दोनों नगर निगम 16वें और 20वें नंबर पर आकर इतराते तो हैं, मानो देश को स्वच्छता का पाठ पढ़ा दिया हो। हकीकत यह है कि यह रैंक मात्र 40 शहरों की लिस्ट में मिली है

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जयपुर शहर में स्वच्छता रैंकिंग में सुधार, हालात नहीं बदले, पत्रिका फोटो

जयपुर शहर में स्वच्छता रैंकिंग में सुधार, हालात नहीं बदले, पत्रिका फोटो

Rajasthan Patrika 'Cleanliness culture' campaign: गुलाबी नगर की सफाई अब सिर्फ नाम की रह गई है। देश के 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की स्वच्छता रैंकिंग में जयपुर के दोनों नगर निगम 16वें और 20वें नंबर पर आकर इतराते तो हैं, मानो देश को स्वच्छता का पाठ पढ़ा दिया हो। हकीकत यह है कि यह रैंक मात्र 40 शहरों की लिस्ट में मिली है। पिछली बार 400 शहरों में 171 और 173 पर रह चुके निगमों की ‘तरक्की’ देखकर सवाल उठना लाजमी है - क्या यह सफाई का कमाल है या आंकड़ों की जादूगरी? राजस्थान पत्रिका ने शहर के पिछड़ने के कारणों की पड़ताल की। देश में सफाई के लिहाज से सुपर शहरों की व्यवस्थाओं का अंतर देखा गया। स्पष्ट हुआ कि जयपुर के पीछे रहने के लिए मुख्य रूप से दोनों नगर निगम जिम्मेदार हैं।

क्यों नहीं पहुंच पाता जयपुर टॉप थ्री में?

सवाल यह है कि आखिर जयपुर जैसे शहर टॉप या टॉप थ्री में क्यों जगह नहीं बना पाते? इस बार सुपर स्वच्छ लीग की श्रेणी अलग करने के बाद देश को अहमदाबाद के रूप में नया स्वच्छ शहर मिला। इसके बाद भोपाल और लखनऊ रहे। यहां तक कि आगरा भी टॉप 10 में शामिल हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि कचरा संग्रहण की कमजोर व्यवस्था और संसाधनों की कमी ने जयपुर की रैंक को गिरा दिया। अगर जनभागीदारी को मजबूत करने के लिए अभियान चलाए गए होते तो रैंक और बेहतर हो सकती थी। सुपर लीग में शामिल इंदौर, सूरत, नवी मुंबई, विजयवाड़ा, अहमदाबाद, भोपाल और लखनऊ आगे निकल गए लेकिन जयपुर पिछड़ गया। ऐसे में सभी को साथ काम करने की जरूरत है।

‘स्वच्छता का संस्कार’ अभियान को मिला सर्वधर्म धर्मगुरुओं का साथ

जब नगर निगमों के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हों और स्वच्छता रैंकिंग में जयपुर पिछड़ रहा हो, तब अब शहर के धर्मगुरु सफाई का मंत्र लेकर सामने आए हैं। राजस्थान पत्रिका के ‘स्वच्छता का संस्कार’ अभियान को सर्वधर्म धर्मगुरुओं का भरपूर समर्थन मिल रहा है। महंतों और चातुर्मासरत संतों ने साफ कहा - ‘स्वच्छता कोई विकल्प नहीं, बल्कि आस्था और भक्ति का पहला चरण है।’ उन्होंने लोगों को आह्वान किया कि ईश्वर की भक्ति तभी सार्थक होगी, जब गली-मोहल्ले कचरा मुक्त होंगे।

धर्मगुरुओं ने कहा कि ‘स्वच्छ भारत, निर्मल भारत का सपना तभी साकार होगा, जब हर नागरिक इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाए।’ उन्होंने धार्मिक आयोजनों में प्लास्टिक का प्रयोग पूरी तरह बंद करने का सुझाव भी दिया। महंतों का कहना है कि अगर हर श्रद्धालु अपनी गली, मोहल्ले और मंदिर परिसर को साफ रखने का बीड़ा उठाए, तो जयपुर स्वच्छता में नंबर-वन बनकर पूरे देश के लिए प्रेरणा बन सकता है।

धर्मगुरु ये बोले

लोग तभी जुड़ेंगे जब उन्हें बताया जाए कि सफाई शरीर, मन और पर्यावरण की शुद्धि के लिए क्यों जरूरी है। स्वच्छता को सेवा और साधना बताना होगा। -मुनि तत्व रूचि तरुण, (श्वेतांबर जैन संत )
स्वच्छता केवल बाहरी वातावरण की नहीं, आंतरिक चेतना की भी आवश्यकता है। जहां सफाई है, वहीं साधना संभव है। -आचार्य पूर्णानंदसागर सूरीश्वर (श्वेतांबर जैन संत)
सच्ची सेवा वही है, जो सफाई से शुरू हो। गुरुद्वारों की तरह हर क्षेत्र स्वच्छ और पवित्र होना चाहिए। युवाओं को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा। -ज्ञानी मस्तान सिंह, हजूरी रागी, राजापार्क गुरुद्वारा
पत्रिका ने बड़ा कदम उठाया है। प्रार्थना जितनी जरूरी, उतनी ही जरूरी सफाई भी है। शहर को इंदौर की तरह सिरमौर बनाना है। -फादर दीपक बैरिस्टो, सेंट एंड्रयूज चर्च, चांदपोल
स्वच्छता धर्म है। श्रद्धालु मंदिर आएं तो साफ-सफाई का भी संकल्प लें। कूड़ा ृनिर्धारित स्थान पर डालें। -गोपालदास, महंत, काले हनुमान जी मंदिर
स्वच्छ जयपुर संकल्प भी है और सेवा भी। जिस स्थान पर ईश्वर का वास हो, वहां गंदगी नहीं रह सकती। मंदिर जैसी पवित्रता हर घर में हो। -स्वामी सुदर्शनाचार्य, दासानुदास मंदिर, घाट के बालाजी
पाकीजगी और साफ-सफाई इस्लाम का अहम हिस्सा है। मोहल्लों और गलियों तक सफाई सुनिश्चित हो। कचरा फैलाने वालों पर निगरानी रखी जाएगी। -खालिद उस्मानी, चीफ काजी राजस्थान

इसलिए रहा पीछे

घर-घर कचरा संग्रहण: अहमदाबाद, भोपाल और लखनऊ को 100 फीसदी अंक, जयपुर के दोनों निगमों को केवल 91-91 फीसदी।
सोर्स सेग्रीगेशन: अहमदाबाद को 94 फीसदी, भोपाल को 95 फीसदी और लखनऊ को 97 अंक; जयपुर ग्रेटर को 79 और हैरिटेज को महज 50 फीसदी अंक।
क़चरा निस्तारण: अहमदाबाद, भोपाल और लखनऊ को 100 फीसदी अंक, जबकि जयपुर ग्रेटर को 75 और हैरिटेज को 86 फीसदी अंक।
डम्प साइट सुधार: भोपाल (0 अंक) को छोड़कर अहमदाबाद और लखनऊ को पूरे अंक; जयपुर ग्रेटर को 92 और हैरिटेज को 90 फीसदी अंक।

सीखो इनसे…यह करते हैं सुपर और टॉप शहर

डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण: नगर निगम की 100 फीसदी कवरेज, कोई घर या गली नहीं छूटती।
गीला-सूखा कचरा अलग: हर नागरिक को गीला-सूखा कचरा अलग करने की आदत डाली गई है।

कचरे का प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग:
100 फीसदी कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण।
गीले कचरे से खाद और सूखे कचरे का पुनर्चक्रण।
बिना प्रोसेसिंग के कचरा डंपिंग यार्ड में नहीं भेजा जाता।

नागरिकों की भागीदारी
नागरिकों ने स्वच्छता को आदत बना लिया है।
‘हमारा कचरा, हमारी जिम्मेदारी’ का भाव।

प्लास्टिक मुक्त पहल
सिंगल-यूज प्लास्टिक पर सख्त प्रतिबंध और वैकल्पिक पैकिंग को बढ़ावा।
नगर निगम की टीमें नियमित जांच और जुर्माना करती हैं।

नवाचार और तकनीक
थ्री आर सिद्धांत - रिड्यूस, रीयूज और रीसाइकल का सख्ती से पालन।
ब़ायोमाइनिंग, बायो-सीएनजी प्लांट, कंपोस्टिंग यूनिट।
पुराने डंपिंग यार्ड को गार्डन और खेल मैदान में बदला।
सख्त निगरानी और जुर्माना: सीसीटीवी निगरानी और मौके पर फाइन की व्यवस्था।

पब्लिक टॉयलेट्स और सफाई व्यवस्था
शहरभर में सैकड़ों स्वच्छ और आधुनिक पब्लिक टॉयलेट्स।
सफाई कर्मियों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग।

  • राजनीतिक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति: सफाई को प्राथमिकता बनाना और हर स्तर पर जवाबदेही तय करना।