
बस—ट्रकों के चक्के जाम, आमजन बेबस
रोडवेज बसों के दूसरे दिन भी थमे रहे पहिए
रोजमर्रा जरूरत की चीजों की बाजार में होने लगी किल्लत
रोडवेज बसों की हड़ताल में जमकर मुनाफा कमा रहे निजी बस आपरेटर्स
जयपुर। प्रदेश की सड़कों पर इन दिनों सन्नाटा पसरा हुआ है। बुधवार से शुरू हुई रोडवेज बसों की दो दिवसीय हड़ताल से आमजन परेशान है वहीं आज लगातार सातवें दिन भी ट्रक आपरेटरों की हड़ताल से बाजार में रोजमर्रा जरूरत के सामान की कीमतें किल्लत शुरू होने पर आसमान छूने लगी हैं। फिलहाल आज रात 12 बजे रोडवेज बसों की हड़ताल भले ही खत्म हो जाएगी, लेकिन ट्रकों की हड़ताल आगामी दिनों में यदि बेनतीजा रही तो आंदोलन उग्र रूप ले सकता है।
13 सूत्रीय मांगों को लेकर रोडवेजकर्मियों ने बुधवार से लेकर गुरूवार रात 12 बजे तक रोडवेज बसों का चक्काजाम कर रखा है। हड़ताल से रोजाना रोडवेज को पांच करोड़ रुपए से ज्यादा कमाई से हाथ धोना पड़ा है। वहीं दो दिन की हड़ताल में रोडवेज को करीब दस करोड़ रुपए से ज्यादा नुकसान हो जाएगा। रोडवेज की हड़ताल ने निजी बस आपरेटरों की चांदी कर दी है। बुधवार को प्राइवेट बसों में यात्रा करने वालों से बस आपरेटरों ने मनमाना किराया वसूला।
एटक प्रदेशाध्यक्ष एमएल यादव ने बताया कि 13 सूत्रीय मांग—पत्र को लेकर रोडवेज श्रमिकों की हड़ताल आज रात 12 बजे तक चलेगी। वहीं मांगें पूरी नहीं होने पर रोडवेजकर्मी उग्र आंदोलन भी शुरू करेंगे।
वहीं दूसरी तरफ ट्रकों की हड़ताल आज सातवें दिन भी जारी रही और अब ट्रक हड़ताल का व्यापक असर भी नजर आने लगा है। बाजार मे फल सब्जियों के दाम आसमान छूने लगे हैं। रोजमर्रा जरूरत की अन्य वस्तुओं की भी बाजार मे किल्लत शुरू हो गई है। जयपुर ट्रक ट्रांसपोर्ट चैंबर अध्यक्ष गोपाल सिंह राठौड़ ने बताया कि प्रदेश में 75 हजार से ज्यादा ट्रांसपोर्ट कंपनियों में सात दिन से कामकाज ठप है और करीब 40 लाख से ज्यादा लोगों के सामने रोजी—रोटी का संकट खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार की ओर से अब तक ट्रक हड़ताल खत्म करने को लेकर कोई पहल नहीं हुई है, जिसके चलते आगामी दिनों में अत्यावश्यक वस्तुओं का परिवहन कर रहे ट्रकों को भी ***** जाम में शामिल किया जाएगा।
Updated on:
26 Jul 2018 01:11 pm
Published on:
26 Jul 2018 01:11 pm
