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भाजपा की अग्निपरीक्षा, ये नेता चाहेंगे तो ही उप चुनाव में होगी जीत

राजस्थान की सरदारशहर सीट पर उप चुनाव की बिसात बिछ चुकी है। कांग्रेस ने सहानुभूति वोटों को बटोरने के लिए दिवंगत विधायक भंवरलाल शर्मा के पुत्र अनिल शर्मा को टिकट दिया है तो वहीं भाजपा ने पूर्व विधायक अशोक पिंचा पर दाव खेला है।

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जयपुर

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Umesh Sharma

Nov 16, 2022

भाजपा की अग्निपरीक्षा, ये नेता चाहेंगे तो ही उप चुनाव में होगी जीत

भाजपा की अग्निपरीक्षा, ये नेता चाहेंगे तो ही उप चुनाव में होगी जीत

जयपुर। राजस्थान की सरदारशहर सीट पर उप चुनाव की बिसात बिछ चुकी है। कांग्रेस ने सहानुभूति वोटों को बटोरने के लिए दिवंगत विधायक भंवरलाल शर्मा के पुत्र अनिल शर्मा को टिकट दिया है तो वहीं भाजपा ने पूर्व विधायक अशोक पिंचा पर दाव खेला है। मगर इन चेहरों की बजाय पर्दे के पीछे भाजपा के कुछ नेता है, जिनके मैदान में डटे रहने से ही भाजपा की जीत हो सकेगी। वरना पिछले उप चुनाव की तरह ही पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ेगा।

राजस्थान का शेखावाटी वो इलाका है, जहां भाजपा की स्थिति ज्यादा मजबूत नहीं रही। हालांकि उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ शेखावाटी के चूरू से लगातार विधायक रहे हैं। उन्हें इस क्षेत्र की समझ है। ऐसे में अगर उन्होंने चुनाव की कमान संभाली तो भाजपा को जीत से कोई नहीं रोक सकता। उनके बाद रामसिंह कस्वां सबसे मजबूत नेता हैं, जिन्हें सरदारशहर की पूरी राजनीतिक गणित का अनुभव है। अभी उनके पुत्र राहुल कस्वां सांसद हैं, ऐसे में दोनों पिता—पुत्र की भी भाजपा प्रत्याशी की जीत में भूमिका अहम रहने वाली है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां की जन्मस्थली भी चूरू है। ऐसे में जाट वोटों को भाजपा की तरफ मोड़ने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।

उप चुनाव में हार का मिथक तोड़ सकती है भाजपा

अब तक यह माना जाता रहा है कि उप चुनाव में भाजपा से ज्यादा मजबूत कांग्रेस रही है। आंकड़ें भी इस ओर इशारा कर रहे हैं। पिछले चार सालों में हुए 8 में से 7 उप चुनाव भाजपा ने हारे हैं। इस चुनाव को भाजपा जीतती है तो 2023 के विधानसभा चुनाव में पार्टी कार्यकर्ताओं का जोश सातवें आसमान पर रहेगा।


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एकजुटता सबसे बड़ी टास्क

भाजपा के लिए पिछले चार साल में एकजुटता दिखाना सबसे बड़ी टास्क रहा है। एकजुट नहीं होने का ही नतीजा है कि पार्टी को पंचायत चुनाव, निकाय चुनाव सहित चार साल में ज्यादातर चुनाव में मात खानी पड़ी है। सरदारशहर का चुनाव ऐसा चुनाव है, जिस पर आलाकमान की नजरें हैं। अब देखना होगा कि नेता किस तरह एकजुट होकर यह चुनाव लड़ते हैं।


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