29 अक्टूबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Three-digit fraud: मैं खुद 500 करोड़ के फर्जीवाड़े में शामिल…आरोपियों पर कैसे दर्ज कराऊं केस, हर तीसरा अफसर- कार्मिक आरोपी

Three-digit fraud: जयपुर। परिवहन विभाग में थ्री डिजिट वीआइपी नंबरों के फर्जीवाड़े में शामिल आरोपियों पर कार्रवाई की जा रही है। विभाग ने सभी आरटीओ-डीटीओ को आरोपियों पर केस दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। लेकिन इसमें सबसे अहम बात सामने आ रही है कि प्रकरण में खुद अधिकारी ही जांच के दायरे में आ रहे हैं।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

जयपुर

•

image

Anand Prakash Yadav

•

Updated: 3 Jan 2026, 9:13 AM IST

सांकेतिक तस्वीर, मेटा एआइ

सांकेतिक तस्वीर, मेटा एआइ

जयपुर। परिवहन विभाग में थ्री डिजिट वीआइपी नंबरों के फर्जीवाड़े में शामिल आरोपियों पर कार्रवाई की जा रही है। विभाग ने सभी आरटीओ-डीटीओ को आरोपियों पर केस दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। लेकिन इसमें सबसे अहम बात सामने आ रही है कि प्रकरण में खुद अधिकारी ही जांच के दायरे में आ रहे हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि जो अधिकारी खुद फर्जीवाड़े में शामिल हैं, वह अन्य आरोपी कार्मिकों के खिलाफ एफआइआर कैसे कराएगा। इसको लेकर अधिकारी अब विभाग से मार्गदर्शन मांग रहे हैं। इसके कारण कई कार्यालयों में आरोपियों पर कार्रवाई नहीं की गई है। विभाग ने 31 दिसंबर तक सभी आरटीओ-डीटीओ को कार्रवाई कर सर्टिफिकेट भेजने के निर्देश दिए थे। लेकिन अब तक कई जगह कार्रवाई अटकी पड़ी है।

450 ने किया फर्जीवाड़ा, हर तीसरा आरोपी

विभाग की जांच कमेटी ने इस फर्जीवाड़े में करीब 450 से अधिक अफसर और कार्मिकों को चिन्हित किया है। इन सबके खिलाफ एफआइआर कराने तक के निर्देश दिए जा चुके हैं। निर्देशों के बाद राज्य से सभी आरटीओ- डीटीओ कार्यालयाें में फर्जीवाड़े में लिप्त कार्मिकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है।

परिवहन विभाग में हुए इस फर्जीवाड़े में हर तीसरा अफसर-कार्मिक आरोपी पाया गया है। इनमें से किसी ने पैसों के लालच में तो किसी ने उच्च स्तर पर दबाव के बाद नंबरों में फर्जीवाड़ा किया। पूरे प्रदेश में 450 से अधिक अधिकारी-कार्मिक आरोपी हैं। कमेटी ने करीब 500 करोड़ के फर्जीवाड़े का अनुमान लगाया है।

पत्रिका ने उजागर किया

दरअसल, जयपुर आरटीओ प्रथम में बाबू और सूचना सहायक की ओर से फर्जीवाड़ा करने के बाद पूरे मामले की पोल खुली थी। इस पूरे प्रकरण को राजस्थान पत्रिका ने एक्सपोज किया और बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े का खुलासा किया। इसके बाद विभाग ने सभी आरटीओ कार्यालयों की जांच कराई।