
एसएमएस अस्पताल अग्निकांड (फोटो-पत्रिका)
जयपुर। एसएमएस मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर स्थित आईसीयू में पांच अक्टूबर 2025 को लगी भीषण आग की घटना ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में छह मरीजों की जान चली गई थी। घटना के बाद गठित उच्च स्तरीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि यह त्रासदी केवल आकस्मिक नहीं थी, बल्कि कई स्तरों पर हुई लापरवाही का परिणाम थी।
समिति की अध्यक्षता तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा आयुक्त इकबाल खान ने की थी। रिपोर्ट सामने आए दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक जिम्मेदारों पर ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।
जांच में पाया गया कि 12 बेड का आईसीयू निर्धारित मानकों के अनुरूप निर्मित नहीं था। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) और IPHS के दिशा-निर्देशों के अनुसार आईसीयू में पर्याप्त खुला क्षेत्र, सुव्यवस्थित निकास मार्ग और अलग फायर एग्जिट होना अनिवार्य है। लेकिन संबंधित आईसीयू में केवल एक जटिल प्रवेश-निकास मार्ग था।
बेडों के बीच आवश्यक दूरी भी मानक से कम पाई गई। जहां प्रत्येक बेड के लिए 25 से 30 वर्ग मीटर क्षेत्र होना चाहिए, वहां केवल लगभग 15.5 वर्ग मीटर ही उपलब्ध था। इसके अतिरिक्त, अग्निरोधी पर्दों के स्थान पर एल्युमिनियम पार्टिशन लगाए गए थे, जिससे आपात स्थिति में आवाजाही बाधित हुई।
समिति ने घटनास्थल का निरीक्षण, प्रत्यक्षदर्शियों और स्टाफ के बयान, सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा तथा घटनाक्रम का पुनर्निर्माण (सीन रिक्रिएशन) किया। जांच में यह सामने आया कि आग लगने की सूचना रात लगभग 11:30 बजे ही स्टाफ को दे दी गई थी। परिजनों ने स्टोर रूम से धुआं और जलने की गंध आने की जानकारी दी थी। एक वार्ड बॉय मौके पर पहुंचा, लेकिन स्टोर का ताला बंद होने के कारण लौट गया। आधे घंटे तक स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। जब आग और धुआं तेजी से फैलने लगा, तब अफरातफरी मच गई।
सीसीटीवी फुटेज में यह भी सामने आया कि कुछ नर्सिंग कर्मी अपने ड्यूटी पॉइंट छोड़कर बाहर चले गए। समिति ने इसे गंभीर लापरवाही माना। रिपोर्ट में उल्लेख है कि यदि प्रारंभिक सूचना पर तत्परता दिखाई जाती और फायर सेफ्टी सिस्टम प्रभावी ढंग से कार्य करता, तो जनहानि टाली जा सकती थी। अंततः मरीजों के परिजनों और पुलिसकर्मियों ने अन्य कर्मचारियों की मदद से मरीजों को बाहर निकाला, लेकिन धुएं के कारण छह मरीजों की मौत हो गई।
जांच रिपोर्ट में कई अधिकारियों और कर्मचारियों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया है। फायर डिटेक्शन और फायर फाइटिंग सिस्टम की जिम्मेदारी संभाल रही फर्म पर गंभीर अनदेखी का आरोप लगाया गया है। विद्युत विभाग के अधिकारियों पर शॉर्ट सर्किट संबंधी जोखिमों को समय रहते दुरुस्त न करने का दोष तय किया गया।
सिविल और अस्पताल अभियंताओं पर रखरखाव में लापरवाही तथा सीपेज जैसी समस्याओं की अनदेखी करने के आरोप लगे। नर्सिंग इंचार्ज और ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ पर सूचना के उचित संप्रेषण और आपात प्रबंधन में विफल रहने की जिम्मेदारी तय की गई। तत्कालीन अधीक्षक और नोडल अधिकारी की मॉनिटरिंग भी असफल पाई गई।
Updated on:
25 Feb 2026 04:31 pm
Published on:
25 Feb 2026 04:31 pm
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