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होलिका दहन और रंग वाली होली के बीच एक दिन का अंतर, जानें ऐसा क्यों हो रहा है पहली बार

Holi 2026: धर्माचार्यों के अनुसार ऐसा पहली बार हो रहा है कि छोटी होली और बड़ी होली के बीच एक दिन का गैप आ रहा है...

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जयपुर

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Abhishek Mehrotra

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नम्रता पुरोहित कांडपाल

Feb 25, 2026

Holi 2026

Holi 2026 (सोर्स- एक्स)

Holi 2026: उमंग और उल्लास का त्यौहार होली इस बार दो मार्च को मनाया जाएगा, 2 मार्च 2026 सोमवार को होलिका दहन किसा जाएगा और चार मार्च को रंगों वाली होली जिसे धूलेंडी कहते है खेली जाएगी, चूंकि तीन मार्च 2026 वार मंगलवार को पूर्ण चंद्र ग्रहण रहेगा इसलिए दो मार्च को प्रदोष काल में होलिका दहन किया जाएगा।

कब से लग रहा है होलाष्टक? (Holi 2026)

वैसे, होली के आठ दिन पहले से शुरू हो जाता है होलाष्टक, कई बार सुना जाता है कि होलाष्टक बैठ गया है अब कुछ काम नहीं होंगे तो आइए जानते हैं कि इस बार होलाष्टक कब से लग रहा है और होलाष्टक के दिनों में किन कामों को करने की मनाई होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह में शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है फिर उसके अगले दिन धूलंडी यानी रंगों वाली होली खेली जाती है और होली के आठ दिन पहले लगता है होलाष्टक जिसका समापन होलिका दहन के साथ पूर्णिमा तिथि को होता है। इन आठ दिनों में कोई भी मंगल कार्य नहीं किया जाता है इस साल होलाष्टक 24 फरवरी 2026 से शुरू हुआ है।

उग्र स्वभाव के हो जाते हैं नव ग्रह

होलाष्टक के दौरान सभी नव ग्रहों का स्वभाव उग्र हो जाता है, सभी नवग्रह फाल्‍गुन मास की अष्‍टमी तिथि से अस्‍त और रूद्रा अवस्‍था में चले जाते है। ऐसे में किसी भी शुभ कार्य को करने की मनाई होती है।

इसके अलावा पौराणिक कथा के अनुसार ऐसा माना जाता है कि फाल्गुन मास की अष्टमी के दिन प्रेम के देवता कामदेव ने भगवान शिव की तपस्या भंग की थी, तब उनसे क्रोधित होकर भगवान शिव ने कामदेव को भस्म कर दिया था जिसके बाद कामदेव की पत्नी रति ने शिव की आराधना करने के बाद कामदेव को पुनर्जीवित करने की प्रार्थना की थी। इसके बाद भगवान शिव जी ने रति की प्रार्थना स्वीकार की थी और शिव जी के इस निर्णय के बाद प्रजा में खुशी की लहर छा गई थी।
होलाष्टक का अंत होलिका दहन के दिन हो गया था, कहते हैं इसी वजह से आठ दिन तक शुभ कार्य वर्जित होते हैं।

होलिका दहन से जुड़ी कथा (Holi 2026)

इसके अलावा एक और कथा भी प्रचलित है ऐसी मान्यता है कि होलिका दहन से आठ दिन पहले यानी कि भगवान विष्णु के परम भक्त प्रहलाद को उनके पिता हिरण्यकश्यप ने बहुत प्रताड़ित किया था, प्रहलाद को श्रीहरि की भक्ति से दूर करने के लिए हिरण्यकश्यप ने सात दिनों तक कई यात्रताएं दी थीं। आठवें दिन हिरण्यकश्यप की बहन होलिका ने अपनी गोद में बैठाकर प्रहलाद को भस्म करने की कोशिश की थी लेकिन वह उसमें सफल नहीं हो पाई थी। भक्त प्रहलाद तो बच गए पर होलिका भस्म हो गई। इसलिए होली को बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर भी मनाया जाता है।

होलाष्‍टक में इन कार्यो को करने की मनाही है

विवाह संस्कार, मुंडन संस्कार, नामकरण संस्कार, सगाई सहित सभी हिंदू धर्म के सोलह संस्‍कार नहीं करने चाहिए। संभव हो तो इस दौरान नए मकान, नया वाहन, प्लॉट या दूसरे प्रॉपर्टी की खरीदारी भी ना करें। होलाष्टक के दौरान किसी भी प्रकार का यज्ञ हवन कार्यक्रम नहीं होते हैं। अगर आप नौकरी पेशा है तो इस दौरान नौकरी बदलने से बचें, नई जॉइनिंग से भी बचें, किसी भी प्रकार का नया व्यापार शुरु ना करें।