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Patrika Impact: राजस्थान में कंबोडिया-म्यांमार साइबर फ्रॉड नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई, तीन और सदस्य गिरफ्तार

Cambodia Myanmar Cyber Scam: विदेश में नौकरी का झांसा देकर युवकों को कंबोडिया, म्यांमार और वियतनाम भेजकर साइबर ठगी कराने वाले गिरोह के खिलाफ पुलिस की बड़ी कार्रवाई। पुलिस ने तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया, अब तक कुल 8 आरोपी पकड़े जा चुके हैं।
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Cambodia Myanmar Cyber Scam

विदेश में नौकरी का झांसा देकर साइबर गुलामी में धकेलने वाले तीन आरोपी गिरफ्तार (Photo- Patrika)

Cambodia Myanmar Cyber Scam: अंतरराष्ट्रीय साइबर स्लेवरी (साइबर गुलामी) और साइबर फ्रॉड नेटवर्क के खिलाफ चल रही कार्रवाई में पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। विदेश में नौकरी का झांसा देकर भारतीय युवकों को दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में भेजने वाले गिरोह के तीन और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इन गिरफ्तारियों के बाद अब तक इस मामले में टोटल 8 आरोपियों के पकड़ा जा चुका है। अब पुलिस हिरासत में लिए गए आरोपियों से पूछताछ कर रही है ताकि पूरे नेटवर्का का खुलासा किया जा सके।

नौकरी का लालच देकर भेजते थे कंबोडिया और म्यांमार

एडीजी वी.के. सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी भारतीय युवकों को विदेश में मोटे वेतन और अच्छी नौकरी का लालच देकर कंबोडिया, म्यांमार, वियतनाम समेत दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में भेजते थे। वहां पहुंचने के बाद उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए जाते थे और उन्हें बंधक बनाकर साइबर ठगी कराने के लिए मजबूर किया जाता था। पुलिस के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड गतिविधियों के लिए किया जाता था।

कोलकाता से पकड़े गए आरोपियों से मिला इनपुट

साइबर थानाधिकारी गजेन्द्र शर्मा ने बताया कि इस कार्रवाई में ब्यावर निवासी आरिफ काठात, कानूसिंह और फिरोज काठात को गिरफ्तार किया गया है। इन तीनों आरोपियों के बारे में जानकारी पहले कोलकाता से गिरफ्तार किए गए जीतूराज, रवि कुमार और अनिल कुमार से पूछताछ के दौरान मिली थी। इनपुट मिलने के बाद पुलिस ने दबिश देकर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।

कंबोडिया के साइबर फ्रॉड कॉल सेंटरों से होती थी ठगी

पुलिस जांच में सामने आया है कि कंबोडिया में संचालित चीनी माफिया के साइबर फ्रॉड कॉल सेंटरों के जरिए कई देशों के लोगों को ठगी का शिकार बनाया जाता था। विदेश भेजे गए भारतीय युवकों से भी इन्हीं साइबर फ्रॉड सेंटरों में काम कराया जाता था। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा विदेश भेजे गए युवकों को किस तरह साइबर स्लेवरी में धकेला गया। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच लगातार जारी है और पूछताछ के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी।